बड़ी रेल लाइन निर्माण में राजस्व और रेलवे भूमि के सीमांकन का विवाद अब रेलवे और प्रशासन के उच्च अधिकारियों की बैठक में निपटाया जाएगा। इस बीच रेलवे का निर्माण कार्य जारी रहेगा। भूमि सीमांकन से पूर्व निर्माण में बाधक बनने वाले मकान और झालों को हटाने में प्रशासन रेलवे की मदद करेगा। उधर, भूमि सीमांकन के लिए रेलवे और राजस्व के ज्वाइंट सर्वे का लोगों ने विरोध किया। इस दौरान सर्वे टीम और लोगों में जमकर तीखी नोकझोंक भी हुई।
रेलवे और राजस्व भूमि के सीमांकन को एसडीएम नरेश दुर्गापाल के नेतृत्व में सोमवार को शुरू हुए सर्वे कार्य का लोगों ने विरोध किया। भाजपा नेता सुभाष बगौली, दीपक पाठक के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और अतिक्रमण के दायरे में आ रहे लोगों ने सर्वे का जबरदस्त विरोध किया। उन्होंने रेलवे की भूमि पर बसे परिवारों को हटानेे से पहले उनके विस्थापन की मांग उठाई।
जनविरोध के बाद सर्वे कार्य रोक रेलवे और राजस्व विभाग ने नक्शों का मिलान किया और तय किया है कि रेलवे और राजस्व के नक्शों में आ रहे फर्क के बारे में उच्च अधिकारियों की बैठक में कोई रास्ता निकाला जाएगा। उप जिलाधिकारी दुर्गापाल ने बताया कि रेलवे के पास मौजूद 1909 के नक्शे में रेलवे पटरी से पश्चिमि छोर पर 168 मीटर भूमि रेलवे की दर्ज है। जबकि राजस्व के पास 1921 और 1960 के दो नक्शे हैं, जिसके मुताबिक पटरी से पिश्चिमि छोर पर 148 मीटर भूमि रेलवे की निकल रही है। उन्होंने बताया कि नक्शों में आ रहे अंतर पर रेलवे और प्रशासन के उच्च अधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
इस मौके पर रेलवे के सीनियर इंजीनियर निर्माण पीलीभीत महाराज सिंह, योगेश कुमार, स्टेशन अधीक्षक केडी कापड़ी, तहसीलदार, पालिका के ईओ शेखर चंद्र जोशी, पटवारी आदि मौजूद थे। सीओ आरएस रौतेला और कोतवाल वीसी शर्मा के नेतृत्व में भारी पुलिस फोर्स मौके पर तैनात रहा।