रोडवेज पहाड़ में आवाजाही का सबसे बड़ा जरिया तो है, लेकिन इसकी बसें भरोसेमंद कतई नहीं हैं। यह गंतव्य तक कितने समय में पहुंचाएंगी, इसका ठीक-ठीक पता तो बस चलाने वालों को भी नहीं है। शनिवार को रोडवेज की एक बस ने बीच मंझधार में यात्रियों का साथ छोड़ दिया। बस के खराब होने से उसमें सवार 29 यात्री दो घंटे से अधिक वक्त तक फंसे रहे। बाद में दूसरी बस से उन्हें मंजिल की ओर रवाना किया गया।
पिथौरागढ़ डिपो की बस (यूके 07 पीए/1048) शनिवार को दिल्ली से पिथौरागढ़ जा रही थी। यह बस चंपावत से करीब 7 किलोमीटर आगे बढ़ी ही थी कि बस की गड़बड़ी ने इसके पहिये थाम लिए। काफी देर की मशक्कत के बाद भी बस आगे नहीं बढ़ी, तो ड्राइवर सीताराम और कंडक्टर विजय कुमार ने लोहाघाट डिपो से आग्रह कर बस का बंदोबस्त कराया। इस बस के सहारे थके-हारे यात्रियों ने आगे का सफर तय किया। कुछ महीनों पूर्व पिथौरागढ़ की एक बस में तकनीकी खामी से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें एक दर्जन से अधिक यात्रियों की मौत हुई थी।