सिंगदा के पास बारहमासी सड़क का मलबा गधेरे में धकेलने से बनी झील।
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प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने की कोशिश में बारहमासी सड़क बनाने वाली कंपनी मलबे को डंप करने में भी मानकों की साफ अनदेखी कर रही है। हाल यह है कि डंपिंग जोन में फेंका जा रहा मलबा भी नदी और नालों तक पहुंच रहा है। खैरानी बैंड के लिट्टी खान तोक में यह साफ दिख भी रहा है और यह सब इस वजह से भी है कि डंपिंग जोन में मलबे को समेटे रखने के लिए दीवार नहीं बनाई गई।
इस सुरक्षा दीवार के न होने के कारण सड़क की कटिंग से निकला मलबा यहां डंप होने पर पहाड़ी से नीचे खिसककर गधेरे में पहुंच रहा है। ग्रामीण जोगा सिंह, दिवान सिंह, मदन सिंह, कमल सिंह आदि का कहना है कि पानी का बहाव अवरुद्ध होने से कई जगह छोटी-छोटी झीलें भी बन गई हैं। सिंगदा के भुवन सिंह, महेश सिंह, शंकर लाल, जोगा सिंह, चंचल सिंह, तेज सिंह, पुष्कर सिंह आदि का कहना है कि सिंगदा बागधारा के समीप बनाए गए डंपिंग जोन के नीचे कोई सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई है।
इससे सारा मलबा नदी में समा गया है। नदी ने झील का रूप ले लिया है। उनका कहना है कि मरोड़ाखान से लेकर घाट तक बहने वाले नालों को मलबे से पाट दिए जाने के कारण यहां करीब 200 मीटर लंबी और पांच मीटर गहरी झील बन गई है। इससे हर वक्त यहां ग्रामीणों के मवेशियों, जंगल जाने वाली महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों के डूबने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि एक साथ तालाब के टूटने पर निचले हिस्से में रहने वाले पांच से अधिक परिवारों को भारी नुकसान का खतरा है। उन्होंने संबंधित कंपनियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई न करने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
ठेकेदार को डंपिंग जोन के नीचे वायरक्रेट दीवार लगाने के साथ पानी की निकासी के रास्ते को साफ करने के सख्त निर्देश दिए हैं। निर्देशों का पालन न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
एलडी मथेला, ईई, राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण खंड, लोहाघाट।