राजनीतिक दल हर बार चुनावों में विकास का नारा देते हैं। इस बार भी दे रहे हैं, लेकिन विकास की हकीकत तो कुछ और ही कहती है। पोलिंग बूथों की पैदल दूरी इसकी एक बानगी है।
जिले के 285 मतदान केंद्रों में से 48 की रोड से पैदल दूरी पांच किमी से अधिक की है, जबकि 15 केंद्रों की दूरी तो 10 किमी से भी ज्यादा है। सबसे अधिक 18 किमी की पैदल दूरी वाला मतदान केंद्र नौलियागांव का है।
2012 के विधानसभा चुनावों में जिले में 298 में से 26 बूथों की पैदल दूरी दस किमी से ज्यादा थी। पांच साल बाद 285 मतदान केंद्रों के 320 बूथों में से 15 की पैदल दूरी दस किमी से अधिक है। ये तस्वीर विकास की असलियत को भी आइना दिखाती है।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी हेमंत कुमार वर्मा ने बताया कि चंपावत सीट पर 113 मतदान केंद्रों के 142 मतदेय स्थलों में से 22 मतदान केंद्रों का पैदल फासला 5 किमी या उससे अधिक है, जबकि लोहाघाट सीट पर 172 केंद्रों में बने 178 मतदेय स्थलों में 22 मतदान केंद्रों का पैदल फासला 5 किमी और इससे ज्यादा है। इन इलाकों के लोगों को तो रोजमर्रा के काम में परेशानी होती ही है, यहां तक पहुंचने के लिए मतदान टीमों को भी मशक्कत करनी पड़ती है। दूरदराज केंद्रों की चुनाव टीम को चुनाव तिथि से दो दिन पूर्व 13 फरवरी को भेजा जाएगा।
चंपावत विधानसभा सीट
मतदान केंद्र पैदल दूरी (किमी)
चूका 17
बुंगा दुर्गापीपल 15
खिरद्वारी 14
कोटकेंद्री, आमनी, मटकांडा, रियासीबमन व डांडा: 10
लोहाघाट विधानसभा सीट
मतदान केंद्र पैदल दूरी (किमी)
नौलियागांव 18
कलियाधुरा 17
करौली 15
सील बरूड़ी 13
टांण, मंगललेख व कोठेरा 10
200 गांव रोड से कटे हैं
चंपावत जिले के 200 गांव अब भी रोड से कटे हैं। करीब एक-तिहाई गांव अब भी सड़क से वंचित हैं। कुल 651 राजस्व गांवों में 449 में ही रोड हैं। कई गांवों में रोड मंजूर तो हो गई है, लेकिन इनमें ये रोड बन नहीं सकी है। 13 हजार से अधिक की आबादी रोड मार्ग से वंचित है। रोड की कमी ग्रामीण क्षेत्रों को बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने में बाधक बन रही है।