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करोड़ों के भुगतान के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्थाएं

Thu, 17 Mar 2016 10:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
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यहां के सरकारी अस्पताल का प्रबंधन पीपीपी मोड बरेली के गंगाशील अस्पताल को 25 अक्तूबर 2013 को सौंपा गया था। तब से अब तक सरकार अस्पताल प्रबंधन को 6 करोड़ 32 लाख 51 हजार 563 रुपये का भुगतान कर चुकी है, लेकिन अस्पताल में अव्यवस्थाओं हैं कि थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिस कारण रोगियों की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है। अनुबंध के अनुसार यहां 10 विशेषज्ञ और दो एमबीबीएस डॉक्टर हर वक्त होने चाहिए, लेकिन यहां पूरे समय रेडियोलॉजिस्ट, सर्जन, आई सर्जन, फिजीशियन, निश्चेतक आदि डॉक्टर नहीं रहे।
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नदारद पाए गए अधिकांश डाक्टर
बृहस्पतिवार को अस्पताल में दंत चिकित्सक और ईएमओ के अलावा शेष डॉक्टर नदारद पाए गए। बताया जाता कि डॉक्टरों को ढाई माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उन्होंने सामूहिक रूप से अवकाश लेकर अपनी नाराजगी जताई है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

बंद नहीं हुआ बाजार से दवा मंगाना
शील अस्पताल प्रबंधन को राज्य सरकार प्रतिमाह 22 से 25 लाख रुपये देने के अलावा 25 हजार रुपये रोगियों की दवाई के लिए अलग से देती है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाओं की अलग व्यवस्था की जाती है। इसके बावजूद बाजार से दवा मंगाने का क्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार की ओर से एक डिलीवरी पर 16 सौ रुपये, एक दुर्घटना में चार सौ रुपये, एक्सरे में 90 रुपये, लैब में 30 रुपये प्रति टेस्ट दिया जाता है। अनुबंध में रोगियों को डॉक्टर की सलाह पर भोजन देना अनिवार्य है, लेकिन यहां रोगियों को इससे मोहताज रखा जाता है। 
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नवजात और प्रसूता की हालात गंभीर
अस्पताल की अव्यवस्थाओं का शिकार हुई किमतोली नाकोट की प्रसूता बबीता की हालत अब भी गंभीर बनी है, जबकि उसके नवजात को हायर सेंटर खटीमा ले जाया गया था, जहां से डॉक्टरों ने उसे बरेली रेफर कर दिया, जहां उसकी हालत गंभीर बनी है।
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