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कठिन है कठुवापाती में सिडकुल की राह

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चंपावत। चंपावत के प्रवेशद्वार कठुवापाती में सिडकुल (राज्य अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास निगम) की स्थापना की राह आसान नहीं है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने 2017 में टनकपुर दौरे पर यह घोषणा की थी। लेकिन आरक्षित वन भूमि के चलते मामला लटका रहा। बाद में शासन ने इस घोषणा को निरस्त कर दिया। अलबत्ता प्रशासन अभी भी सर्वे एजेंसी के जरिये भूमि की स्पष्टता के साथ सिडकुल के लिए प्रयासरत है। इस संबंध में डीएम ने शासन को पत्र भी भेजा है।
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कठुवापाती को सिडकुल से जोड़ औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मुख्यमंत्री ने जून 2017 में घोषणा की थी। इसके लिए कुछ प्रयास भी हुए। उद्योग विभाग के जीएम मीरा बोहरा का कहना है कि कठुवापाती के 43.50 हेक्टेयर में औद्योगिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव तैयार कर उद्योग निदेशालय और प्रमुख सचिव उद्योग को भेजा गया था। लेकिन जमीन नहीं मिल पाने से यह घोषणा खटाई में पड़ गई है। साथ ही शासन द्वारा भी इस प्रस्ताव को निरस्त मान लिया गया है।
ये है अड़चन:
वन और राजस्व विभाग के मानचित्र में कठुवापाती की जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद है। कठुवापाती में सिडकुल बनाने में सबसे बड़ी अड़चन सैकड़ों पेड़ों के होने के साथ ही इस क्षेत्र के बड़े हिस्से का आरक्षित वन में आना है। वन अनापत्ति की जटिल प्रक्रिया को पूरा करने में आ रही अड़चनों और अत्यधिक धन खर्च होने से इस प्रस्ताव को शासन ने खारिज कर दिया।
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कोट
सिडकुल बनाए जाने का प्रस्ताव कुछ समय पूर्व शासन ने खारिज कर दिया। इसके बावजूद जिला प्रशासन सिडकुल के लिए प्रयासरत है और इसकी राह में आ रही बाधाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है। सर्वे ऑफ इंडिया से कठुवापाती का सर्वे कराने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। सर्वे के लिए सहमति मिलने पर एजेंसी को बजट भी दिया जाएगा।
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सुरेंद्र नारायण पांडेय,
डीएम, चंपावत।
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