अपने बेटे स्वप्निल को दाखिला दिलाने के बाद खुशी जताते प्रधानाध्यापक अधिकारी।
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जहां एक ओर अभिभावकों में अपने बच्चों को बड़े-बड़े निजी विद्यालयों में भेजने की होड़ लगी हुई है, वहीं कुछ ऐसे शिक्षक भी हैं, जो अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। पाटी विकासखंड का राजकीय प्राथमिक विद्यालय गड्यूड़ा नवीन ऐसा ही स्कूल हैं, जहां के प्रधानाध्यापक शंकर सिंह अधिकारी ने अपने बेटे स्वप्रिल अधिकारी का कक्षा तीन में प्रवेश कराकर उम्दा उदाहरण प्रस्तुत किया है।
अधिकारी ने कड़ी मेहनत के बल पर इस राजकीय विद्यालय का नाम क्षेत्र में रोशन किया है। 2012 में स्कूल में कार्यभार संभाला। तब यहां की छात्र संख्या महज 22 थी। और अब यह संख्या बढ़कर 63 हो गई है। विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों से प्रभावित होकर कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को निजी विद्यालयों से हटाकर इस सरकारी विद्यालय में प्रवेश दिलाया है। प्रधानाध्यापक शंकर अधिकारी का कहना है कि विद्यालय का अस्तित्व छात्र-छात्राओं को लेकर ही है। और उन्हें पढ़ाई के साथ खेल और दूसरे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाना चाहिए। प्रधानाध्यापक शंकर अधिकारी की विद्यालय और छात्र-छात्राओं के प्रति समर्पण को देखकर प्रभावित हुए ग्रामीणों ने चार नाली निजी भूमि विद्यालय को दान की।
वेतन का दस फीसदी भाग बच्चों के विकास में खर्च करते हैं
प्रधानाध्यापक शंकर अधिकारी हर माह अपने वेतन का 10 फीसदी भाग छात्रों और विद्यालय विकास में खर्च करते हैं। उन्होंने विद्यालय में किचन गार्डन का निर्माण, अपना लैपटॉप, दो सामुदायिक शिक्षक अपने खर्च से रखे हैं। साथ ही गरीब बच्चों को समय-समय पर शिक्षण सामग्री भी दी जाती है। इस वर्ष विद्यालय में 11 नए छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।