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नोटबंदी के बाद बाजार में अब भी बनी है मंदी

Wed, 28 Dec 2016 08:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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चंपावत में बंद पड़ा पीएनबी का एटीएम। - फोटो : अमर उजाला
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 नोटबंदी के 50 दिन पूरे होने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। बैंकों से लोगों को अभी भी पर्याप्त मात्रा में कैश नहीं मिलने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है।
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नोटबंदी के बाद बाजार में आई मंदी अभी भी बनी हुई है। बैंकों में कैश के लेनदेन के लिए सुबह से ही लगने वाली लोगों की भीड़ अब धीरे-धीरे कम होने लगी है।

जिले में 60 एटीएम में से करीब 55 एटीएम काम कर रहे हैं, जबकि पीएनबी, आईडीबीआई बैंक के एटीएम बुधवार को बंद रहे। नोटबंदी के बाद लोग अब अपनी जरूरत भर का ही सामान खरीद रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि कैश की कमी के चलते बाजार में ग्राहकों का खरीदारी के प्रति रुझान कम होने से उन्हें बैंकों से लिए ऋणों का ब्याज चुकाना तक मुश्किल हो गया है।

बैंकों से लोगों को पर्याप्त मात्रा में कैश न मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिला लीड बैंक अधिकारी आनंद सिंह रावत का कहना है कि जिले में 17 बैंकों की 59 से अधिक शाखाओं में एक हजार और पांच सौ रुपए के करीब तीन अरब रुपए जमा किए जा चुके हैं।
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चंपावत एसबीआई को मिला केवल 65 करोड़
चंपावत जिले के लीडिंग बैंक एसबीआई की मुख्य चेस्ट ब्रांच को आठ नवंबर से लागू हुई नोटबंदी के बाद केवल 65 करोड़ रुपए की नई करेंसी ही प्राप्त हुई है। मुख्य शाखा प्रबंधक हीरा सिंह पांगती ने बताया कि रिजर्व बैंक की ओर से चंपावत शाखा को तीन अलग अलग समय में 65 करोड़ की नई करेंसी ही उपलब्ध कराई गई है। 

दुकान का किराया और डीलरों का भुगतान रुका
 यहां भी बैंकों में पर्याप्त मात्रा में कैश न होने के कारण लोगों को कई दफा बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। 50 दिन बाद भी एटीएम की स्थिति में भी कोई खास सुधार नहीं हो पाया है। नगर में लगे आधा दर्जन एटीएम से लगातार कैश नहीं मिल पा रहा है।

नोटबंदी के बाद से एटीएम में एक दिन में मात्र दो हजार रुपए ही निकल पा रहे हैं। कंप्यूटर का कारोबार करने वाले व्यवसायी सुरेंद्र सिंह बोहरा का कहना है कि लोगों के पास पर्याप्त कैश न होने से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो गया है। मंदी के चलते दुकान का किराया और डीलरों के भुगतान में काफी दिक्कतें हो रही हैं। वहीं रजाई व्यवसायी अय्यूब भाई का कहना है कि नोटबंदी के बाद बाजार में आई मंदी के कारण उन्होंने तीन कारीगरों को कम कर दिया है। जो कारीगर हैं भी तो उनका पूरा भी नहीं हो पा रहा है। नोटबंदी के बाद भारतीय स्टेट बैंक की लोहाघाट शाखा में पांच सौ और एक हजार रुपए के 15 करोड़, 12 लाख, 41 हजार रुपए जमा किए गए हैं।
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