चंपावत। मार्च में अचानक हुए मौसम परिवर्तन ने आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। दिन में तेज धूप और रात को कड़ाके की ठंड के बीच झूलते तापमान ने वायरल बुखार, खांसी और कुछ हद तक श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रही है।
जिला अस्पताल में ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। कुछ ही घंटों में तापमान में होने वाले उतार-चढ़ाव के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है। इसी दौरान वायरस और बैक्टीरिया को शरीर में पनपने का मौका मिल जाता है। ठंड बढ़ने पर नाक और गले की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं। साथ ही बुखार और सर्दी-जुकाम होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस ह्यांकी ने बताया कि मौसम परिवर्तन के बाद हर साल यही स्थिति बनती है। लेकिन इस बार ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। मौसम परिवर्तन होने से मार्च माह में बच्चों और बुजुर्गों की वायरल बुखार की चपेट में आने की अधिक संभावनाएं हैं। वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अजय कुमार ने बताया कि ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। मौसम के अनुकूल होकर पोषण आहार देने के साथ ही उबला पानी पीना चाहिए। खाना ताजा खाएं।