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चंपावत के सीमांत गांवों में खुलेंगे कुमाऊं के पहले छह दुग्ध उत्पादक सेवा केंद्र

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चंपावत। श्वेत क्रांति का मॉडल बन रहे चंपावत जिले में दुग्ध उत्पादकों को सुविधा देने के लिए छह दुग्ध उत्पादक सेवा केंद्र बनाए जाएंगे। इन केंद्रों का प्रस्ताव मुख्यमंत्री बीएडीपी (सीमावर्ती क्षेत्र विकास योजना) में किया गया है। दुग्ध उत्पादक सेवा केंद्र खोलने वाला चंपावत जिला कुमाऊं मंडल का पहला जिला होगा।
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नेपाल सीमा से लगे चंपावत जिले के दो सीमांत ब्लॉक लोहाघाट और चंपावत में छह दुग्ध उत्पादक सेवा केंद्र बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री बीएडीपी की 2021-22 की योजना में 15 लाख रुपये से लोहाघाट में चार और चंपावत में दो सेवा केंद्र प्रस्तावित किए गए हैं। दुग्ध संघ प्रबंधक राजेश मेहता ने बताया कि इन सेवा केंद्रों के जरिये दुग्ध उत्पादकों को पशुपालन सुविधा सहित कई तरह सुविधा मिलेगी। जिले में 199 दुग्ध समितियों के जरिये 13 हजार लीटर दूध हर रोज एकत्र होता है। इसमें 2735 महिलाओं वाली 70 महिला डेरी समितियों का पांच हजार लीटर दूध भी शामिल है। (संवाद)
जल्द तैयार होंगे दुग्ध संघ के दो ग्रोथ सेंटर
चंपावत। जिले में दो मिल्क ग्रोथ सेंटर जल्द ही बनकर तैयार हो जाएंगे। 24 लाख रुपये से ये सेंटर रमक और रौसाल में बन रहे हैं। इन सेंटरों के जरिये पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों को लाभ होगा। दोनों ग्रोथ सेंटरों के लिए दूध स्थानीय स्तर पर एकत्र किया जाएगा। इस दूध से मुख्य रूप से घी बनाया जाएगा। इन ग्रोथ सेंटरों के जरिये आय में बढ़ोतरी होगी। चंपावत दुग्ध संघ में भी दूध न लाने से आसपास की नौ समितियां का ढुलान बचेगा। (संवाद)
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कोट
दुग्ध उत्पादक सेवा केंद्र का संचालन संबंधित क्षेत्र की दुग्ध समितियां करेंगी। दूरदराज के ग्रामीणों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उनकी आय भी बढ़ेगी।
- पार्वती जोशी, अध्यक्ष, चंपावत दुग्ध संघ।
ये काम करेंगे सेवा केंद्र
भूसा और पशु आहार की उपलब्धता।
पशुओं की प्राथमिक उपचार के साथ जरूरी दवाएं मिलेंगी।
दुग्ध प्रोत्साहन की योजनाओं की जानकारी दी जाएगी।
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना।
दुग्ध पालन, पशुपालन के अलावा कृषि संबंधी योजनाओं से रूबरू कराना।
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