नेपाल में मधेसी आंदोलन के चलते डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की किल्लत बरकरार है। टनकपुर-बनबसा से सटे कंचनपुर जिले में धनगढ़ी से लगे उत्तर प्रदेश के गौरीफंटा से कुछ आपूर्ति सुचारु हो गई है। वहां के व्यवसायियों का कहना है कि इससे पचास प्रतिशत डिमांड पूरी हो रही है, लेकिन अब भी किल्लत से दूरस्थ क्षेत्रों में यातायात में पचास प्रतिशत वाहनों की कटौती से हालात गंभीर हैं।
नेपाल में नया संविधान लागू होने के बाद तेज हुए मधेसी आंदोलन से प्रमुख वीरगंज के रक्सौल बॉर्डर की नाकेबंदी से डीजल, पेट्रोल एवं रसोई गैस की आपूर्ति ठप पड़ी है। इसके अलावा रुपेडिया, सुनौली में भी आपूर्ति बंद है। इधर, बीते कई दिनों से नेपाल के दूरस्थ क्षेत्रों में ईंधन एवं रसोई गैस की किल्लत से लोग बेहाल हैं। इससे टनकपुर-बनबसा से सटे कंचनपुर जिला भी प्रभावित है। जिला मुख्यालय महेंद्रनगर में पिछले हफ्ते तक करीब 70 प्रतिशत बसों के पहिये थम गए थे। साथ ही आवश्यक वस्तुओं की कीमत भी महंगी हो गईं। इधर, अब धनगढ़ी से लगे गौरीफंटा बॉर्डर से डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस की आपूर्ति सुचारु हो गई है, परंतु आपूर्ति इतनी नहीं हो पा रही है कि उससे डिमांड पूरी हो सके।
महेंद्रनगर के महाकाली बस व्यवसायी समिति के अध्यक्ष नवीन भट्ट ने बताया कि गौरी फंटा बॉर्डर से ईंधन आ रहा है, लेकिन अब भी जिले में पचास प्रतिशत बसें ही चल पा रही हैं। काठमांडू के लिए आठ पर चार-पांच बस एवं धनगढ़ी के लिए भी आधी बसों का संचालन हो पा रहा है। उधर, बताया गया कि कंचनपुर प्रशासन की ओर से आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की आपूर्ति कराई जा रही है। पचास प्रतिशत वाहन ही बमुश्किल सड़कों पर दौड़ पा रहे हैं। शीघ्र मधेसी आंदोलन का समाधान न होने पर स्थिति बिगड़ने से इनकार नहीं किया जा रहा है।
नेपाल के पत्रकार श्याम भट्ट के मुताबिक नेपाल में चीन से दस लाख लीटर ईंधन और अनुदान मिला था। वर्तमान में गौरीफंटा से आपूर्ति होने से पचास प्रतिशत डिमांड ही पूरी हो पा रही है। आपूर्ति में व्यवधान का शीघ्र हल निकालना आवश्यक है।