लोहाघाट (चंपावत)। उत्तराखंड बनने के बाद जिले का पहला स्टेडियम यहां छमनियांचौड़ में मंजूर हुआ। लेकिन जून 2015 से इसका कार्य 54 माह बाद भी अधूरा है। यहां तक कि गुणवत्ता विवाद और धन रिलीज न होने से अगस्त 2018 से इसका काम भी बंद पड़ा हुआ है।
सुई ग्राम पंचायत के लोगों ने स्टेडियम के लिए छह हेक्टेयर जमीन निशुल्क दी। तब लोगों में इसके निर्माण को लेकर काफी उम्मीदें थी। लेकिन उनकी उम्मीदें अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। निर्माण कार्य घटिया गुणवत्ता ने सुरक्षा दीवार ध्वस्त कर दी। जांच के फेर में पड़े मामले से निर्माण में हो रही देरी यहां के युवाओं के सपनों के आड़े आ रही है। 10.92 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस स्टेडियम के लिए अभी तक मात्र 4.25 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं। जिससे सुरक्षा दीवार, दौड़ने के लिए ट्रैक, टेरिस कटिंग, मैदान समतलीकरण, ड्रेनेज निर्माण, ब्रिक वर्क आदि किया गया है। लेकिन इससे आगे का काम बजट न मिलने से अधर में है। कार्यदायी संस्था उप्र निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक संजय चौधरी का कहना है कि शासन से धन नहीं मिलने से काम लटका है। बजट के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
घटिया गुणवत्ता की जांच में हुई थी पुष्टि
लोहाघाट (चंपावत)। करीब 50 लाख रुपये से बनी सुरक्षा दीवार इस साल बरसात में ध्वस्त हो गई थी। तीन सदस्यीय जांच टीम ने गुणवत्ता में खामी पाई थी। जिसके बाद डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने निर्माण की जांच उच्च स्तरीय तकनीकी संस्थान से कराने की संस्तुति की थी। अलबत्ता अभी इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। ब्यूरो
कोट....
स्टेडियम निर्माण में हो रही देरी से युवाओं की प्रतिभा से खिलवाड़ हो रहा है। घटिया गुणवत्ता की जल्द जांच पूरी कर आगे का काम शुरू किया जाए। तभी खिलाड़ियों से लेकर गांव के लोगों द्वारा दी गई नि:शुल्क जमीन का लाभ मिल सकेगा।
योगेश ओली
कोट
स्टेडियम निर्माण में देरी खेल और खिलाड़ियों पर असर डाल रही है। शीघ्र काम शुरू करने को सीएम से लेकर पीएम तक पत्र भेजे जा चुके हैं, मगर कोई फायदा नहीं हुआ है। स्टेडियम पूरा नहीं होने से नौजवान फौज आदि की भर्ती के लिए सड़क में दौड़ लगा रहे हैं।
आरपी ओली
कोट
स्टेडियम के काम में हो रही देरी के मसले को खेल मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा। निर्माण कार्य जल्द शुरू करवाने के लिए बजट अवमुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा।
पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक।
कोट
स्टेडियम के काम में पाई गई घटिया गुणवत्ता से आगे के कार्य में देरी हो रही है। गुणवत्ता की तकनीकी संस्था से जांच के बाद ही आगे का बजट मिल सकेगा।
आरएस धामी, जिला क्रीड़ाधिकारी।