बगेड़ी ग्राम पंचायत के आगर गांव के बच्चों की पढ़ाई की राह आसान नहीं है। स्कूल जाने के लिए यहां के छोटे बच्चों को एक तरफ 2.5 किलोमीटर का उतार-चढ़ाव भरा रास्ता तय करना पड़ रहा है। बरसात और जाड़ों में इस दूरी को पार करना काफी कठिन होता है।
इस कठिनाई को दूर करने की कवायद पर उत्तराखंड अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (यू-सेक) की मैपिंग की चूक ने पानी फेर दिया है। अलबत्ता शनिवार को सर्वशिक्षा अभियान (एसएसए) के जिला परियोजना अधिकारी ने यू-सेक को पत्र भेजकर दूरी के सर्वे में हुई गलती को सुधारने का आग्रह किया है।
यू-सेक के मानचित्र में आगर बजौन गांव से विद्यालय की दूरी को 1.04 किमी (1040 मीटर) दर्शाया गया है, जबकि राजस्व उप निरीक्षक की आख्या के आधार पर आगर की प्राथमिक विद्यालय बजौन से दूरी 2.5 किमी है। जिला परियोजना अधिकारी सत्यनारायण का कहना है कि इस कारण 2016-17 में राज्य सर्वशिक्षा अभियान की बैठक में नए विद्यालय के रूप में भेजे प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया और आगर के बच्चे ढाई किमी दूर बजौन में पढ़ने को मजबूर हैं।
शिक्षा विभाग की रिपोर्ट बताती हैं कि स्कूल जाने का पैदल रास्ता खतरनाक, खड़ी ढाल एवं फिसलन युक्त है। वहीं शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक स्कूल खोला जाना चाहिए। इसके लिए स्कूल जाने वाले 25 बच्चों की अनिवार्यता है।
यू-सेक की इस खामी का नुकसान 2.5 किमी दूर बजौन स्कूल जाने वाले 29 नन्हें बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। बजौन प्राथमिक की 70 की छात्र संख्या में 29 बच्चे सिर्फ बजौन के हैं। इन्हें स्कूल पहुंचने में 55 मिनट से अधिक का वक्त लगता है। जो जाड़ों और बरसात में परेशानी भरा रहता है।
शिक्षा विभाग ने संशोधन को खत भेजा
चंपावत के जिला समन्वयक अजय कुमार चौबे के नेतृत्व में शुक्रवार को एसएसए की टीम ने मौका मुआयना किया। ग्राम प्रधान प्रेमबल्लभ जोशी एवं अन्य स्थानीय लोगों से हुई वार्ता के आधार पर टीम ने आगर गांव से बजौन स्कूल की दूरी को 2.5 किमी बताया है। एसएसए के जिला परियोजना अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में कहा गया कि फासला दर्शाने में यू-सेक की ओर से चूक हुई है। यह दूरी 1.04 किमी नहीं, बल्कि 2.5 किमी है। जिला परियोजना अधिकारी को भेजी रिपोर्ट में कहा गया है कि आगर में प्राथमिक विद्यालय खोला जाना न केवल शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अनुरूप होगा, बल्कि छोटे बच्चों को स्कूल जाने के लिए तय किए जाने वाले खतरनाक रास्तों से बचाव में भी मददगार होगा।