उपकरण के लिए तरसते रैघाड़ी गांव के दिव्यांग परमानंद।
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चंपावत। चंपावत से 47 किलोमीटर दूर बाराकोट ब्लाक के रैघाड़ी गांव के दिव्यांग परमानंद (55) शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के शिविर में गए, मगर उन्हें मायूसी मिली। एक पांव के बगैर बैशाखी के सहारे चलने वाले परमानंद को शिविर में किसी तरह की मदद नहीं मिली। उन्होंने स्वास्थ्य व समाज कल्याण विभाग पर अनदेखी का आरोप लगाया।
रैघाड़ी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह की मदद से चंपावत पहुंचे परमानंद का एक पांव हादसे में कट गया। पांव कटने से घोड़ा चलाने का काम भी छूटा और पूरे परिवार में रोजी-रोटी का संकट छा गया। 85 प्रतिशत दिव्यांग परमानंद शनिवार को चंपावत महोत्सव में लगे स्वास्थ्य शिविर में पहुंचे। विभाग ने समाज कल्याण विभाग के पास भेजा। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत का कहना है कि पांव के लिए मांग भेजी जाएगी। एल्मिको (कृत्रिम अंग निर्माण निगम) अंग का निर्माण कराता है। परमानंद का कहना है कि उसे आयुष्मान कार्ड से भी खास लाभ नहीं मिल रहा है। ब्यूरो