जिले में पुस्तकों की कमी छात्रों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। इसके अलावा जिले के किसी भी पुस्तकालय में पुस्तकालय सहायक के पद स्वीकृत नहीं हैं। कहने को तो हर विद्यालयों में पुस्तकालय खोले गए हैं। लेकिन पुस्तकों की खरीद को पर्याप्त धनराधि की व्यवस्था नहीं होने से छात्रों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। हालात यह हैं कि बीते तीन सालों से जिले में पुस्तक मेला नहीं लग पाया है।
जिले में 57 इंटर और 48 हाईस्कूल हैं। इन सभी 105 विद्यालयों के पुस्तकालयों में 70491 किताबें उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) से प्रतिवर्ष हर विद्यालय को 50 हजार रुपये की धनराशि विद्यालय अनुदान निधि से दी जाती है। रमसा के जिला समन्वयक भुवन शंकर पांडेय ने बताया कि विद्यालय अनुदान निधि से मिली धनराशि में से दस हजार रुपये पुस्तकालय के विकास के लिए मिलते हैं। विद्यालय प्रबंधन समिति से प्रस्ताव पास कर पुस्तक और पुस्तकालय से संबंधित जरूरी सामान की खरीद की जाती है। पुस्तकालय में दैनिक हिंदी और अंग्रेजी अखबारों की खरीद करना जरूरी है। जबकि 20-20 हजार रुपये विज्ञान की गतिविधि बढ़ाने और स्कूल के आकस्मिक खर्च की मद में दिए जाते हैं।
कोर्स की किताबों का भी अभाव
चंपावत। राजकीय बालिका इंटर कालेज के पुस्तकालय में कोर्स की किताबों का अभाव बना हुआ है। प्रधानाचार्य हेमंती बोरा का कहना है कि वर्तमान में मनोविज्ञान, जीव विज्ञान, हिंदी, गणित और भौतिक विज्ञान की ही किताबें उपलब्ध हैं। छात्राएं कोर्स की किताबों का अध्ययन पुस्तकालय में करती हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
मांग के अनुसार दी जाती हैं छात्रों को पुस्तकें
चंपावत। आदर्श राजकीय इंटर कालेज में चार छात्रों को कोर्स की सभी विषयों की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। प्रधानाचार्य सीपी गहतोड़ी ने बताया कि कक्षा 12 के गिरीश पंगरिया और विजय कुमार जबकि कक्षा 11 के नीरज कुमार राकेश शर्मा को सामाजिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, भूगोल, हिंदी, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और कामर्स की किताबें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा पुस्तकालय में प्रतियोगी परीक्षाओं की भी किताबें उपलब्ध हैं। जिन्हें मांग के अनुसार छात्रों को दिया जाता है।