संभागीय परिवहन प्राधिकरण (आरटीए) की बैठक में उत्तराखंड के राष्ट्रीकृत मार्गों पर केएमओयू (केमू) की बसों को 190 परमिट जारी किए जाने के फैसले का रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने कड़ा विरोध किया है। संगठन ने आगाह किया कि परिवहन निगम की आय प्रभावित करने वाले किसी भी फैसले का वह विरोध करेंगे।
यहां हुई संगठन की बैठक में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीकृत मार्गों पर निजी यात्री बसों के संचालन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सालों से प्रतिबंध लगा रखा है। उन्होंने कहा कि परिवहन निगम ही यात्रियों को आरामदायक यात्रा की सुविधा मुहैया करा सकता है। मौजूदा समय में निगम में करीब साढ़े सात हजार अधिकारी और कर्मचारी कार्यरत हैं, जो निगम हित में कार्य कर रहे हैं। संभागीय परिवहन प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीकृत मार्गों पर केमू की बसों को परमिट जारी किए जाने के फैसले से निगम की आय पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने परिवहन प्राधिकरण के इस फैसले को मोटर यान अधिनियम 1988 के विपरीत बताया है। उन्होंने आयुक्त एवं संभागीय परिवहन प्राधिकरण के अध्यक्ष को ज्ञापन भेजकर आगाह किया कि केमू की बसों को परमिट जारी किए गए तो संगठन कर्मचारी और उनके परिजनों को साथ लेकर सड़क पर उतरेगा। बैठक में कर्मचारी नेता बलदेव प्रसाद, भुवन चंद्र पांडेय, सतीश ज्याल, रमेश भट्ट, नारायण बिष्ट, उमेश पंत, भूप सिंह, विनोद नौटियाल, लीलाधर शर्मा, जगदीश पुरी, राजेंद्र बिष्ट, दिवान सिंह, नवीन जोशी, नारायण सिंह दानू, जीवन लाल, ईश्वरी दत्त त्रिपाठी, किशन राम, महादेव राणा, रामस्वरूप राणा, टीका सिंह आदि मौजूद थे।