लोहाघाट (चंपावत)। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचआई की ओर से घाट-पनार मोटर मार्ग पर किए जा रहे पुल निर्माण के दौरान निकल रहा मलबा पनार नदी में धड़ल्ले से धकेला जा रहा है। इससे एक ओर सरयू नदी में लगातार मलबा भरता जा रहा है, दूसरी तरफ वन संपदा और नदी में रहने वाले जीव जंतुओं को भारी नुकसान पहुंच रहा है। पर्यावरण प्रेमियों ने नदी में मलबा डालने पर रोक लगाकर मलबा डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
उनका कहना है कि एनएचआई की ओर से घाट-पनार मोटर मार्ग पर दो पुलों का निर्माण किया जा रहा है। इस स्थान पर सड़क चौड़ीकरण का कार्य भी किया जा रहा है। लेकिन ठेकेदार की ओर से मनमाने तरीके से सारे मलबे को पनार नदी में डाला जा रहा है। इस स्थान पर आए दिन डेढ़ से दो घंटे तक जाम लग रहा है। जाम में फंसने से पिथौरागढ़ से हल्द्वानी को जाने वाले कोविड मरीजों के अलावा अन्य लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वाहन चालकों का कहना है कि इस स्थान में करीब सौ मीटर मार्ग पर वह जान हथेली में लेकर चलने को मजबूर हैं। पहाड़ी से पत्थर गिरने का खतरा भी बना हुआ है। चंदर सिंह, पुष्कर सिंह, नरेंद्र सिंह आदि का कहना है कि मलबे को सीधे नदी में डाले जाने से नदी का रुख गांव की ओर हो रहा है। जो भविष्य में खतरा बन सकता है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य से उठने वाली धूल से स्थानीय लोगों और व्यापारियों जीना मुहाल बना हुआ है। धूल उनकी दुकानों, घरों में घुस रही है। इससे लोगों के बीमार होने का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मलबे को नदी में डालने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है। एनएच के ईई एलडी मथेला का कहना है कि मलबा डालने के लिए डंपिंग जोन बनाया गया है। ठेकेदार को डंपिंग जोेन में मलबा डालने के निर्देश दिए गए हैं। इसका निरीक्षण किया जाएगा।
लधिया नदी से खनन कार्य पर रोक लगाएं
चंपावत। जिले के सीमांत चूका, सीम क्षेत्र के ग्रामीणों ने लधिया नदी में खनन कार्य को तत्काल रोके जाने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में वैश्विक महामारी कोरोना की दूसरी खतरनाक लहर चल रही है। ऐसे में नदी से खनन कार्य जारी रहने पर क्षेत्र में कोरोना संक्रमण के फैलने का अंदेशा है।
इस संबंध में ग्रामीणों की ओर से एसडीएम को ज्ञापन भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि शासन प्रशासन की ओर से वर्तमान में सीम चूका क्षेत्र में खनन कार्य फिर से शुरू कर दिया गया है। इसको लेकर सीम, चूका, खेत, मगरून, ब्यूरी आदि के ग्रामीण लामबंद हो गए हैं। कहा गया है कि ग्रामीण खनन कार्य का विरोध नहीं कर रहे हैं। लेकिन महामारी के दौर में खनन कार्य जारी रखने से ग्रामीणों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। जब तक कोरोना महामारी का प्रकोप कम नहीं हो जाता है खनन कार्य रोका जाए। ज्ञापन देने वालों में खीम सिंह, नारायण सिंह, भरत सिंह, माखन सिंह, सोबन सिंह, राजेंद्र सिंह, पुष्कर सिंह, दीपक सिंह आदि ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य जारी रहने के दौरान भूलवश कोई भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो गया तो बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। संक्रमण फैलने पर क्षेत्र के गरीब ग्रामीण अपना उपचार कैसे करा पाएंगे।