भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की केंद्रीय अनुश्रवण समिति ने नेपाल सीमा से लगी उचौलीगोठ ग्राम पंचायत में केंद्र द्वारा संचालित विकास योजना के तहत हुए कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। साथ ही कार्यों के लिए आवंटित धन और कार्यों की गुणवत्ता का जायजा लेकर आंकड़े एकत्र किए हैं। समिति ने बताया कि किसी ग्राम पंचायत में मनरेगा के कार्यों में अनियमितताएं मिलीं तो उसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई कराई जाएगी।
समिति की टीम ने ग्रामीणों से मनरेगा के तहत जारी जॉब कार्डों और योजना के तहत मिले रोजगार के बारे में जानकारी ली। समिति के सदस्य डा. जसवीर सिंह ने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा केंद्र की वित्त पोषित योजनाओं के लिए पूरे देश में दो फेजों में 50-50 प्रतिशत जिलों का चयन किया जाता है। उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़, चंपावत और हरिद्वार जिले को चुना गया है। उत्तराखंड के तीन जिलों में निरीक्षण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
अंतिम चरण में चंपावत जिले के उचौलीगोठ ग्राम पंचायत में विकास कार्यों का निरीक्षण कर आंकड़े एकत्र किए गए हैं। डा. सिंह ने बताया कि विकास कार्यों का वित्तीय और स्थलीय निरीक्षण किया गया है। विकास कार्यों के एकत्र किए गए आंकड़ों की समीक्षा कर रिपोर्ट केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को सौंपी जाएगी। इस मौके पर खंड विकास अधिकारी शिल्पी पंत, ग्राम विकास अधिकारी तपन गड़कोटी, अशोक रावत, प्रेम चंद्र, ग्राम प्रधान सुरेश महर, गोविंद महर, मदन महर, सांसद प्रतिनिधि नरेश सकारी आदि मौजूद थे।