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विश्व पृथ्वी दिवस पर:न वाहनों का शोर, न धुंध, अब भरपूर हो रहे हिमालय के दीदार

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सीमांत मंच से इस वक्त ऐसा दिख रहा हिम श्रृंखला। - फोटो : CHAMPAWAT
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लॉकडाउन ने नगरों को शोर से मुक्त कर दिया है। वाहनों के नहीं चलने का शोर ही नहीं, डीजल-पेट्रोल से उठने वाली धुंध भी गायब हो गई है। इसका असर यह हुआ कि हमारी धरती और पर्यावरण चहक उठा है। इसकी खूबसूरती भी बढ़ गई है और अब चंपावत के आसपास से होने वाले हिम दर्शन भी भरपूर हो रहे हैं।
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के बीचोंबीच स्थित चंपावत से आमतौर पर रोजाना औसतन 905 से अधिक छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों से खूब धुआं और शोर होता है। हाईवे के किनारे पेड़ों के रंग में पीलेपन से लेकर हरियाली गायब होती रही, लेकिन 22 मार्च से ठप वाहनों ने जमीं को उसके प्राकृतिक रूप में ला दिया है। वाहनों के नहीं चलने से वायु प्रदूषण के साथ ही ध्वनि प्रदूषण भी गायब हो गया है। इस वक्त चंपावत में 70 डेसीबल से कम का शोर है।
इन सबका असर चंपावत के आसपास एबटमाउंट, मंच, गुमदेश आदि क्षेत्रों से नजर आने वाले हिमालय की श्रृंखलाओं पर भी पड़ा है। यहां से नेपाल के एक हिस्से से लेकर बदरीनाथ तक की हिम श्रृंखलाओं में पंचाचूली, नंदाकोट, नंदा खाट, चौखंभा और सबसे ऊंची नंदा देवी चोटी आदि के दर्शन किए जा सकते हैं। एक माह पूर्व तक ये हिम श्रृंखलाएं धुंधली नजर आती थीं। वन संरक्षक केएस बिष्ट कहते हैं कि इन दिनों जिले के विभिन्न हिस्सों से हिम दर्शन बेहद साफ हो रहे हैं।
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सुकुन के लिए हो हफ्ते में एक दिन स्वत: लॉकडाउन
चंपावत। लॉकडाउन से निखरी धरती के बाद पर्यावरण के प्रति संजीदा लोग अब यह सवाल उठाने लगे हैं कि क्यों न सामान्य हालत में हफ्ते में एक दिन लॉकडाउन किया जाए। शिक्षक गणेश पुनेठा, पर्यावरण के जानकार विवेक जोशी कहते हैं कि मजबूरी में उठाया कदम बीमारी का इमरजेंसी में इलाज करने जैसा होगा। बेहतर हो कि लोग सप्ताह में एक दिन वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करें, घरों से बाहर कम निकलें।
ऐसा करने से संयम की सीख से लेकर पर्यावरण को बेहतर करने में योगदान कर सकेंगे। और हमारी धरती सेहतमंद भी रह सकेगी। कहते हैं कि वायु प्रदूषण से बचने के लिए दिल्ली जाड़ों में वाहनों के ऑड-इवन सिस्टम को मजबूर होती है। साफ पानी, शुद्ध हवा और पर्यावरण को बचाने के लिए पहाड़ के पास यह सुनहरा मौका है।
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