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पूर्णागिरि मेले का निविदा विवाद: पहली मार्च से पहले अदालत में दस्तक देगी जिला पंचायत: अध्यक्ष

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चंपावत। होली के बाद 30 मार्च से शुरू हो रहे मां पूर्णागिरि धाम के मेले के आयोजन और व्यवस्था को लेकर असमंजस थम नहीं रहा है। आयोजक संस्था जिला पंचायत पूर्णागिरि मेले की विभिन्न मदों से मिलने वाली आय 2010 से पहले की तरह जिला पंचायत कोष में जमा कराने की मांग कर चुकी है। इसे लेकर पंचायत 2019 में मेले से होने वाली आय जिला पंचायत के खाते में जमा करने का प्रस्ताव भी पारित किया है। वहीं अब जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति राय ने मेला व्यवस्था के लिए मुंडन के ठेके का अधिकार जिला पंचायत को न देने पर पहली मार्च से पूर्व अदालत जाने की चेतावनी दी है।
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पूर्णागिरि धाम के आरक्षित वन क्षेत्र में गैर वानिकी कार्यों पर रोक के बाद 2010 से मेले की व्यावसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लग गया था। मेले में 2009 तक पार्किंग, मुंडन, तहबाजारी, साइकिल स्टैंड आदि के ठेकों से होने वाली आय जिला पंचायत के खाते में जमा होती थी, जबकि 2009 के बाद से ठेकों से मिलने वाली आय मेला समिति के खाते में जमा हो रही है।
पूर्णागिरि मेले के ठेकों के लिए अब मुहरबंद निविदा
चंपावत। 23 फरवरी को मां पूर्णागिरि धाम मेले के मुंडन और पार्किंग के ठेके न होने के चलते अब इस प्रक्रिया को पहली मार्च को पूरा किया जाएगा। अलबत्ता नीलामी प्रक्रिया में आंशिक बदलाव किया गया है। ठेके को खुली बोली के बजाय मुहरबंद निविदा में आमंत्रित किया गया है। टनकपुर के एसडीएम और पूर्णागिरि मेले के मजिस्ट्रेट हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि ठेके की शर्त में इस बदलाव से ठेके में पारदर्शिता के साथ अधिक राजस्व मिलने की संभावना रहेगी। मुंडन की न्यूनतम राशि 72 लाख, बूम के पार्किंग स्थल की राशि 25 लाख और ठुलीगाड़-भैरव मंदिर की पार्किंग स्थल की न्यूनतम राशि 50 लाख रुपये रखी गई है। (ब्यूरो)
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