रीठा साहिब (चंपावत)। रीठा साहिब के तीन दिवसीय जोड़ मेले के पहले दिन दस हजार से अधिक तीर्थयात्री पहुंचे। पंजाब, दिल्ली, हरियाणा के अलावा नानकमत्ता, हल्द्वानी, खटीमा, सितारगंज, काशीपुर सहित कई जगहों से संगत पहुंची। तीर्थ यात्रियों ने रतिया और लधिया नदी के संगम पर स्नान कर गुरु के दरबार में मत्था टेका। इसी के साथ श्री गुरुग्रंथ साहिब के अखंड पाठ की लड़ी शुरू हुई। मुख्य मेला शनिवार को होगा।
संतों ने सिख धर्म गुरुओं की सेवा और बलिदान की अद्भुत मिसाल सबके लिए प्रेरणादायी है। संतों ने अमृतवाणी के अलावा रीठा साहिब गुरुद्वारे का इतिहास बताया। अखंड सबद-कीर्तन और लंगर चल रहा है। ग्रंथी सागर सिंह, निर्मल सिंह, नवनीत सिंह, जनरल सिंह, करनल सिंह अखंड पाठ कर रहे हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक बाबा श्याम सिंह ने सभी का स्वागत किया। पहले दिन मेले में दस हजार से तीर्थ यात्रियों ने गुरुद्वारे में मत्था टेका। बड़ी संख्या में तीर्थ यात्री बर्तन, जूते-चप्पल साफ कर सेवा में हाथ बंटा रहे हैं।
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चिकित्सा शिविर में 500 लोगों का इलाज हुआ
रीठा साहिब (चंपावत)। रीठा साहिब के जोड़ मेले में से तीन दिनी निशुल्क चिकित्सा शिविर में 500 से अधिक लोगों का इलाज हुआ। पाटी की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. गुरशरण कौर और रीठा साहिब के डॉ. मयंक डिमरी ने इलाज किया।
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पहले राज्यपाल बरनाल भी कर चुके जोड़ मेले में शिरकत
रीठा साहिब (चंपावत)। रीठा साहिब के जोड़ मेले में पहली बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने हिस्सा लिया। 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कार्यक्रम मौसम की खराबी से ऐन मौके पर टला था। अलबत्ता उत्तराखंड के पहले राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला 2002 में रीठा साहिब गुरुद्वारे में जोड़ मेले में आ चुके हैं। उनके अलावा पहले केंद्रीय गृह मंत्री रहते हुए 1982 में ज्ञानी जैल सिंह, केंद्रीय गृह मंत्री रह चुके सरदार बूटा सिंह भी रीठा साहिब के गुरुद्वारे में आए हैं।
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एक पुल से होगा दो जिलों को लाभ
चंपावत के अलावा नैनीताल जिले के गांवों को भी होगा लाभ
रीठा साहिब-परेवा पर पुल बनने से कम होगी 17 किलोमीटर की दूरी
हयात राम/सुरेंद्र राज लडवाल
रीठा साहिब (चंपावत)। जोड़ मेले के पहले दिन रीठा साहिब क्षेत्र को बड़ा तोहफा मिला है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रीठा साहिब से परेवा को जोड़ने वाले मोटर पुल के निर्माण का एलान किया। लधिया नदी पर बनने वाले इस पुल से न केवल तीर्थ यात्रियों और ग्रामीणों का 19 किलोमीटर फासला कम होगा बल्कि चंपावत के अलावा पड़ोसी नैनीताल जिले के गांवों को भी लाभ होगा।
रीठा साहिब से परेवा गांव तक पहुंचने के लिए इस वक्त सड़क से 19 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। पुल बनने से ये फासला सिर्फ दो किलोमीटर रह जाएगा। इस वक्त रीठा साहिब से परेवा जाने के लिए गागरी, चमोली, कुलियालगांव और मछियाड़ गांव जाना होता है। पुल के निर्माण का एलान साकार होने पर यहां के लोगों को न केवल दूरी कम होगी, बल्कि आवाजाही पर खर्च में भी कमी आएगी। इससे परेवा, धरसों, बिनवालगांव, गोलडांडा के अलावा नैनीताल जिले के पतलोड, कैड़ागांव, छेड़ाकान आदि गांवों को लाभ होगा। संवाद