राजकीय प्राथमिक स्कूल चौड़ी गांव के शिक्षक केसी पांडेय ने छात्रों को परंपरागत तरीके से सिखाने के बजाय एक नई पद्धति इजाद की। उनकी पहल पर 2008-09 में लोहाघाट डीआरसी (जिला संसाधन केंद्र) में कुंजापुरी एप्रोच के तहत ड्रीम क्लास रूम बनाया गया।
ये प्रदेश का अकेला डीआरसी है जहां बने क्लास रूम में शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाता है। इसके अंतर्गत कमरे से लेकर दीवार और छत में वॉल पेंटिंग व पुस्तकों के जरिए शिक्षण, ज्ञानवर्द्धक और प्रेरणाप्रद सामग्री दी जाती है। इस कमरे में शिक्षक की मौजूदगी के बगैर छात्रों को छोड़ दिया जाता है और उन पर किसी तरह की बंदिश नहीं लगाई जाती है।
यहां पुस्तकें और आकृतियों के जरिए उनके शिक्षण और तर्क क्षमता को विकसित किया जाता है। इस काम में उन्हें तत्कालीन डीआरसी प्राचार्य जितेंद्र सक्सेना और डॉ. नवीन जोशी का खास सहयोग मिला। डीआरसी के प्राचार्य केसी साक्य बताते हैं कि शिक्षक पांडेय की पहल के बाद सीआरसी किमतोली और ढोरजा में 18-18 स्कूलों में इस तकनीक से ड्रीम कक्षाओं का निर्माण किया गया।
शिक्षक पांडेय ने विवेकानंद विद्या मंदिर के बाद सरकारी शिक्षण सेवा शुरू की। सादगी पसंद होने के साथ ही शिक्षण के प्रति इस कदर जुनूनी है कि उन्होंने 55 वर्ष होने के बावजूद विवाह नहीं किया। छोटे स्कूली बच्चे उनके दोस्ताना रवैये से खुद-ब-खुद पढ़ने को प्रेरित होते हैं।
लोहाघाट डीआरसी में बना ड्रीम क्लास रूम।- फोटो : LOHAGHAT