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39 दिन तक लटके रहे टांण अस्पताल में ताले

Wed, 09 Sep 2015 10:49 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
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लधिया घाटी का टांण राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) मरीजों के लिए मरहम से ज्यादा जख्म देने वाला अस्पताल बन गया है। ये अस्पताल पूरे 39 दिन बंद रहा। इस कारण मरीजों को यहां से करीब 48 किलोमीटर (24 किमी आना और 24 किमी जाना) की अतिरिक्त दूरी तय चौड़ामेहता (श्रीरीठा साहिब) के अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ा। अलबत्ता बुधवार को अस्पताल के ताले खुल गए।
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15 नाली में अस्पताल परिसर है। अस्पताल के स्टाफ के लिए परिसर में ही आवास भी बने हैं, लेकिन इसमें कोई रहता नहीं। गतिविधियां कम होने की वजह से अस्पताल परिसर में घास और झाड़ियां उग गई हैं। लकड़ी का गेट टूटा है। अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता भी ठीक हाल में नहीं है। अक्सर अस्पताल बंद रहता है। इस बीच 1 अगस्त से 8 सितंबर तक अस्पताल में ताले लटके थे। नागरिकों का कहना है कि कुछ वक्त को छोड़कर इससे पूर्व भी माह तक यहां तालाबंदी थी। कई बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सम्मुख मामले को उठाने के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकला। भोला गड़कोटी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि यह अस्पताल टांण के अलावा साल, डांडा, ककनई आदि गांवों के लोगों का केंद्र है, लेकिन अस्पताल की खस्ताहाल सेवा से ग्रामीणों को लाभ नहीं मिल रहा है।

पीएलवी ने रिपोर्ट भेजी
चंपावत। श्रीरीठा साहिब क्षेत्र के अर्द्धविधिक स्वैच्छिक स्वयंसेवक (पीएलवी) हयात राम ने अस्पताल के दुर्दशा की रिपोर्ट जिला न्यायालय को भेजी है। 28 अगस्त को भेजी रिपोर्ट में उन्होंने इस अस्पताल के लंबे समय से बंद होने का जिक्र किया है। कहा कि इस वजह से अस्पताल का मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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श्रीरीठा में लगी थी ड्यूटी : डा.कमल
चंपावत। टांण एसएडी के प्रभारी डा.कमल ने कहा कि वे एक अगस्त से चौड़ामेहता (श्रीरीठा साहिब) अस्पताल में सेवा दे रहे थे। इस वजह से टांण के अस्पताल का संचालन नहीं हो सका। उनका कहना है कि इस आशय के मौखिक निर्देश सीएमओ द्वारा दिए गए थे।

बेखबर बना है विभाग
लोहाघाट। ग्राम प्रधान भागीरथी गड़कोटी ने बताया कि घाटी में इस मौसम में रोग पनपने का  खतरा होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गई है। लोग इलाज के लिए 24 किमी पैदल सफर करने के बाद टनकपुर या 85 किमी दूर लोहाघाट अथवा टनकपुर जाने को मजबूर होना पड़ता हैं। दो दिन पूर्व ही टांण की केशवी देवी (17) को उल्टी-दस्त के चलते लोहाघाट राजकीय अस्पताल में लाया गया।

पांच अगस्त से डॉक्टर बगैर श्रीरीठा अस्पताल
चंपावत। श्रीरीठा अस्पताल भी पांच अगस्त से डॉक्टर के बगैर है। यहां का जिम्मा फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी के पास है। इस घाटी क्षेत्र में इस वक्त उल्टी-दस्त, बुखार के काफी मरीज आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि डॉक्टर नहीं होने से यहां परेशानी हो रही है। ग्रामीणों ने स्थायी डॉक्टर की तैनाती की मांग की है। बता दें कि इस अस्पताल पर रमक, मंगलेख, बारसी, गोलडांडा,  बिनवालगांव, चौड़ापित्ता, कुल्यालगांव, मछियाड़, तलाड़ी के अलावा नैनीताल जिले के सीमावर्ती कैड़ागांव, अमजड़, अधौड़ा, मौड़ा, बसानीधुरा, सुकोट पोखरी आदि गांव के लोगों की निर्भरता है।

टांण अस्पताल के डॉक्टर को नियमित रूप से अस्पताल में ड्यूटी देने को कहा गया है। श्रीरीठा  साहिब के डॉक्टर के गायब रहने की जानकारी तलब की जा रही है। अवकाश लिए बगैर गायब रहने पर वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। -डा.प्रवीण कुमार, सीएमओ, चंपावत।
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