टनकपुर (चंपावत)। टनकपुर परिक्षेत्र बसों की कमी का सामना कर रहा है। इस कारण बसों का संचालन नियमित रूप से नहीं हो पा रहा है। परिक्षेत्र में टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़ डिपो आते हैं। इनमें 175 बसें हैं। इन बसों की स्थिति ठीक नहीं है। कई बसें चलते-चलते रास्ते में रुक जाती हैं।
उत्तर प्रदेश के दौर में परिवहन निगम के टनकपुर परिक्षेत्र के पास 240 बस का बेड़ा होता था। तब नियमित रूप से बसों का संचालन होता था। वर्तमान समय में टनकपुर परिक्षेत्र के बसों की कमी से जूझने के कारण सभी रूटों पर संचालन करना आसान नहीं होता है। सबसे अधिक दिक्कत पहाड़ी क्षेत्रों के डिपो को बसों के संचालन में आती है। लंबी दूरी की बसों का संचालन कई बार काफी मुश्किल से होता है। मानकों के मुताबिक पहाड़ में बसों का संचालन सात लाख किमी तक किया जाता है। इसके बाद इन बसों को मैदानी क्षेत्रों में भेज दिया जाता है लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में कई बसें मानक पूरे करने के बाद भी दौड़ रही हैं। मैदानी क्षेत्र में आठ लाख किमी चलने के बाद बस संचालित नहीं की जाती है। बसों की कमी के कारण सभी रूटों पर नियमित रूप से बस संचालित नहीं हो पाती है।
रोडवेज के सीनियर फोरमैन सुरेश चंद पांडे का कहना है कि टनकपुर क्षेत्र के टनकपुर, लोहाघाट और पिथौरागढ़ डिपो के पास मिलाकर महज 175 बसें हैं। इसमें 25 बसें ऑफ रूट हैं।
टनकपुर डिपो में 85 बसें हैं। 12 ऑफ रूट हैं। लोहाघाट डिपो में 32 बसों में से तीन ऑफ रूट हैं। 25 बसों का संचालन हो रहा है। जबकि पिथौरागढ़ डिपो में 58 बसें हैं लेकिन 45 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसमें 10 बसें ऑफ रूट हैं। टनकपुर डिपो के अंतर्गत मैदानी क्षेत्रों में 24 अनुबंधित बसें संचालित हो रही हैं। मंडलीय प्रबंधक आलोक बनवाल ने बताया कि तीनों डिपो में यात्रियों की स्थिति को देखते हुए बसों की मांग की जाएगी।