राष्ट्रीय राजमार्ग में स्थित स्वांला राजकीय एलोपैथिक अस्पताल (एसएडी) में छात्र प्रकाश भट्ट (16) चोटिल होकर आया। पर यहां इलाज के लिए न कोई डॉक्टर है और न कोई फार्मेसिस्ट। यहां की समूची जिम्मेदारी वार्ड ब्वाय खीम सिंह के पास है और शनिवार को भी उन्होंने ही इस छात्र के पांव की मरहम-पट्टी की। एनएच के दूसरे अस्पतालों की स्थिति भी इससे खास बेहतर नहीं है। दो अन्य केंद्रों में भी डॉक्टर नहीं है।
एनएच के सिर्फ इसी अस्पताल में डॉक्टर न हो, ऐसा नहीं है। यहां आपदा के मद्देनजर सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र चल्थी में भी एलोपैथिक डॉक्टर नहीं है। धौन अस्पताल का भी जिम्मा फार्मेसिस्ट का है। इन जगहों में न केवल रोड बंद होने का खतरा खासा ज्यादा रहता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं के वक्त भी राहत की जरूरत होती है। मगर यहां अस्पतालों की ऐसी तस्वीर आम वक्त से लेकर आपदा तक के लिए खतरा है। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग में आपदा के नजरिए से सबसे संवेदनशील हिस्सा टनकपुर से चंपावत का 75 किलोमीटर भाग है।
स्वांला के डॉक्टर पीजी की पढ़ाई करने गए हैं। श्रीरीठा साहिब से संबद्ध डॉक्टर को उनके मूल तैनाती स्थल श्रीरीठा साहिब भेजा गया है। इस वजह से यहां डॉक्टर नहीं है। धौन और चल्थी में भी एलोपैथिक डॉक्टर नहीं है। अलबत्ता चल्थी में आयुर्वेदिक डॉक्टर से काम चलाया जा रहा है। नई नियुक्ति होने पर यहां डॉक्टर भेजे जाएंगे।
डॉ. रश्मि पंत, प्रभारी सीएमओ, चंपावत।