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परवान नहीं चढ़ पा रही स्वदेश दर्शन योजना

Thu, 11 May 2017 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
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मां बाराही मंदिर देवीधुरा। - फोटो : अमर उजाला
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जिले में कुदरती सौंदर्य, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के पर्यटक स्थलों की भरमार के बाद भी पर्यटन विकास का कारोबार गति नहीं पकड़ पा रहा है। जिले में प्रतिवर्ष आने वाले विदेशी सैलानियों की संख्या जहां नाममात्र है, वहीं पर्यटन का कारोबार देसी पर्यटकों के सहारे चल रहा है।
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उस पर नाम बड़े और दर्शन छोटे की कहावत को चरितार्थ करते हुए पर्यटकों को लुभाने के लिए संचालित की जा रही स्वदेश दर्शन योजना भी यहां परवान नहीं चढ़ पा रही है। स्वदेश दर्शन योजना के तहत चंपावत जिले में पत्थर मार युद्ध के लिए प्रसिद्ध देवीधुरा के साथ ही अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर, कटारमल और बागेश्वर जिले के बैजनाथ को जोड़ा जाना है।

देवीधुरा में 1733.64 लाख रुपये की लागत से बाराही योद्धा भवन का निर्माण किया जाना है। चंपावत जिले में पर्यटन के नाम पर कुछ चुनिंदा स्थान ही विकसित हो सके हैं, जो वर्ष 1997 में अलग जिला और वर्ष 2000 में अलग उत्तराखंड राज्य बनने से पूर्व तक थे। इसमें भी ज्यादातर ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल हैं।
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जहां पर्यटन विभाग के प्रयासों से कम बल्कि श्रद्धा भाव के चलते पर्यटकों की आमद अधिक होती है। उत्तर भारत का प्रमुख मां पूर्णागिरि धाम, स्वामी विवेकानंद के अनुयायियों का बनाया श्यामलाताल, मायावती अद्वैत आश्रम, मां बाराही धाम देवीधुरा, मीठे रीठे के चमत्कार के लिए प्रसिद्ध गुरुद्वारा श्रीरीठा साहिब आदि पर्यटक स्थल जिला और राज्य बनने से पहले से सैलानियों के जेहन में हैं।

उसके बाद किसी भी नए इलाके में सैलानियों के नजरिए से अवस्थापना ढांचे को भी सशक्त करने के ठोस प्रयास नहीं हुए। यहां तक कि पर्यटक आवास गृहों का निर्माण ऐसे स्थानों में किया गया है, जहां पर्यटक पहुंच ही नहीं पाते हैं। जिला पर्यटन विकास अधिकारी राजेंद्र सिंह ऐरी का कहना है कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत देवीधुरा में कार्यदायी संस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम की ओर से मृदा परीक्षण कराने के साथ ही साइट का चयन कर लिया गया है। जल्द ही निविदाएं आमंत्रित कर बाराही योद्धा भवन का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

पर्यटन विकास न होने से कारोबार ठंडा पड़ा
चंपावत। जिले में पर्यटन का अपेक्षित विकास न होने के कारण यहां का कारोबार ठंडा पड़ गया है। न तो चंपावत जिले का नाम ही पर्यटन मानचित्र में है और न ही पर्यटन स्थानीय रोजगार देने में मददगार है। सैलानियों की आमद में इजाफा जिले की आर्थिक तरक्की के लिए फायदेमंद रहता पर सड़क, अच्छी आवासीय व्यवस्था समेत तमाम सुविधाओं के न होने का नुकसान इलाके को झेलना पड़ रहा है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पर्यटन सर्किट जैसे कार्यक्रम भी पर्यटन कारोबार को प्रोत्साहन देने में असफल रहे हैं।
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जिले में पांच वर्षों में पर्यटकों की आमद का ब्यौरा
वर्ष            देसी पर्यटक        विदेशी पर्यटक        कुल     
2012          81044           242              81286
2013          72494           349              72843
2014          64879           166              68045
2015          48197            96              48293
2016          89241           237              89478
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