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संस्कृत गांव बनाने के लिए खर्ककार्की में होगा सर्वेक्षण

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चंपावत। प्रदेश की दूसरी राजभाषा संस्कृत को चंपावत जिले में लोकप्रिय करने का श्रीगणेश खर्ककार्की गांव से शुरू होगा। प्रदेश के 13 अन्य गांवों के साथ इस गांव को भी संस्कृत गांव के रूप में विकसित करने का उत्तराखंड संस्कृत अकादमी पहले ही निर्णय ले चुका है। अब खर्ककार्की में संस्कृत भाषा को लोकप्रिय बनाने के लिए सर्वे और कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसकी शुरुआत 15 मार्च से की जाएगी।
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चंपावत जिले में देवीधुरा और चंपावत संस्कृत महाविद्यालय है, लेकिन इसके बावजूद इस देववाणी को जानने-समझने वाले खासे कम लोग हैं। संस्कृत भाषा को जनभाषा बनाने के लिए अकादमी ने प्रदेश के सभी 13 जिलों से एक-एक गांव को संस्कृत गांव के रूप में बनाने का निर्णय लिया। हर गांव के लोगों को संस्कृत भाषा को लिखने, बोलने और व्यवहार में उपयोग में लाने लायक बनाने के लिए मुख्य प्रशिक्षक और एक सहायक प्रशिक्षक तैनात किया जाएगा। संस्कृत संभाषण में दक्ष और अन्य बुद्धिजीवियों को इसमें शामिल किया जाएगा।
संस्कृत के विद्वान और राष्ट्रपति पुरस्कार विजेता सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य डॉ. कीर्तिबल्लभ सक्टा ने बताया कि 15 मार्च को संस्कृत अकादमी के निदेशक खर्ककार्की गांव में संस्कृत को लेकर सर्वेक्षण करेंगे। सर्वे के बाद ग्रामीणों को संस्कृत भाषा सीखाने के लिए जरूरी उपाय किए जाएंगे।
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उत्तराखंड के जिलों के चयनित संस्कृत गांव:
चंपावत: खर्ककार्की, पिथौरागढ़: उर्ग, अल्मोड़ा: जागेश्वर, ऊधमसिंह नगर: गूलरभोज, नैनीताल: पतलोट, देहरादून: मालदेवता, पौड़ी: फलस्वाड़ी, टिहरी: सांवली, रुद्रप्रयाग: डांगी बांगर, चमोली: रतूड़ा, उत्तरकाशी: मुखवा, हरिद्वार: मुंडयाकी गांव, बागेश्वर जिले में अभी गांव का नाम तय नहीं।
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