चंपावत। बाराकोट ब्लाक की दो ग्राम पंचायतें बगैर प्रधानों के हैं। दो बार चुनाव होने के बावजूद दस महीनों से यहां न कोई ग्राम प्रधान है और नहीं ही ग्राम पंचायत का गठन हो सका है। लेकिन अब उम्मीद है कि इनमें से एक पंचायत को प्रधान मिल जाएगा। ये हालात ग्राम पंचायत में एक नए वोटर के जुड़ने से ये संभावना बनी है।
सितंबर 2019 में त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव हुए थे। जिले के सभी 313 प्रधानों के साथ 134 बीडीसी व 15 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव हुए। मगर ग्राम प्रधानों की दो सीटों (सुंगरखाला व नदेड़ा) के लिए एक भी नामांकन पत्र नहीं आ सका। ये हाल सितंबर में हुए चुनाव के बाद दिसंबर 2019 में हुए उप चुनाव में भी रहा। इसकी वजह दोनों ग्राम पंचायतों में एक भी पात्र प्रत्याशी का नहीं होना था।अब मतदाता सूची में संशोधन से सुंगरखाल को भविष्य में होने वाले उप चुनाव में प्रधान मिल सकेगा। अब 617 वोटरों में एक पात्र उम्मीदवार हो गया है। सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी संजीव रावत बताते हैं कि 48 साल के एक व्यक्ति नारायण राम ने सुंगरखाल ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में नाम दर्ज कराया है। फर्तोला का प्रधान रह चुका एससी जाति का यह शख्स प्रत्याशी होने की सभी जरूरी पात्रता रखता है। इधर नदेड़ा ग्राम पंचायत की स्थिति अभी जस की तस है। एससी आरक्षित इस ग्राम पंचायत में एससी के पांच परिवारों के 30 लोगों में सभी दूसरे प्रदेश या दूसरे जिले के नौकरी करने वाले हैं। ऐसे में यहां प्रधान पद के लिए प्रत्याशी मिलना फिलहाल मुमकिन नहीं है।
कोट
नदेड़ा और सुंगरखाल ग्राम पंचायत में प्रधान न होने से न तो मनरेगा की कार्ययोजना बन पाई और नहीं दूसरी योजनाओं का क्रियान्वयन हो पा रहा है। अलबत्ता कोविड-19 महामारी के दौर में आए प्रवासी लोग और ग्रामीणों के जरूरी कार्य ब्लाक स्तर से कर राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया।
विनीता फर्त्याल,
ब्लाक प्रमुख, बाराकोट।