तल्लादेश क्षेत्र की मंच उप तहसील में लटके ताले।
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विधानसभा चुनाव से एन पहले दिसंबर 2016 में नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र की मंच उप तहसील खोली गई थी। तब फरवरी 2017 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के तत्कालीन विधायक हेमेश खर्कवाल ने इसका उद्घाटन भी कर दिया था लेकिन उन चुनावों को बीते दो साल से अधिक का वक्त हो गया और लोकसभा चुनाव में भी अब बस छह दिन बाकी हैं।
इन दोनों चुनावों के बीच मंच गांव की इस उप तहसील के दरवाजे नहीं खुल सके हैं। इस उप तहसील से एक भी प्रमाणपत्र जारी नहीं हो सका है। गांव के लोगों के लिए लोकसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा है। सियासी दल इसे लेकर प्रचार के दौरान बस आश्वासन की रस्म ही अदा कर रहे हैं।
दिसंबर 2016 में उद्घाटन के एक माह बाद से उप तहसील में ताला लटका है। मौजूदा सरकार ने भी इसे खुलवाने के लिए अभी तक कोई प्रभावी पहल नहीं की है। ग्रामीणों का कहना है कि मंच उप तहसील के संचालित नहीं होने से क्षेत्र की 14 ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार की आबादी को जरूरी प्रमाणपत्र बनाने के लिए 35 किमी दूर चंपावत आना पड़ रहा है।
खतौनी की नकल, आधार कार्ड, स्थायी निवास, जाति, आय प्रमाणपत्र के साथ जरूरी दस्तावेज बनाने के लिए ग्रामीणों को चंपावत जिला मुख्यालय के चक्कर काटने पड़ते हैं। इधर एसडीएम अनिल गर्ब्याल का कहना है कि इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कत होने के साथ ही स्टाफ की कमी से उप तहसील के संचालन में अड़चन आ रही है।
कोरी घोषणाओं से परेशान लेकिन वोट जरूर देंगे
तल्लादेश क्षेत्र के ग्रामीण बिशन महर, शंकर महर, भीम महर, ईश्वरी देवी और हीरा सिंह आदि का कहना है कि आजादी के सात दशक बाद भी सीमांत तल्लादेश क्षेत्र मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां तक कि ढाई साल पूर्व खुली मंच उप तहसील के दरवाजे नहीं खुल पा रहे हैं। वोट के लिए ज्यादातर नेता कोरी घोषणाएं तो खूब करते हैं लेकिन चुनाव बाद उन्हें आम लोगों की परेशानियों से सरोकार नहीं रहता। उनका कहना है कि उपेक्षा के बावजूद वे 11 अप्रैल को वोट जरूर देंगे।