राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) तैयार करने में शिक्षकों की भी मदद ली जा रही है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। ड्यूटी से मुक्त करने की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा है।
संघ जिलाध्यक्ष पान सिंह मेहता, मंत्री जगदीश अधिकारी और प्रवक्ता नरेश राय ने कहा कि बड़ी संख्या में अध्यापकों को एनपीआर तैयार करने में प्रगणक का दायित्व दिया गया है। ये काम 17 नवंबर से 16 दिसंबर तक चलेगा। इस एक माह की अवधि में छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होगी। 25 दिसंबर से करीब डेढ़ माह का शीतकालीन अवकाश हो जाता है। फरवरी से प्रायोगिक परीक्षा शुरू हो जाएगी। ऐसे में छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ेगा। नतीजा बोर्ड के परीक्षाफल पर पड़ेगा।
संघ का कहना है कि परीक्षाफल कम होने पर छात्रों के नतीजों के साथ ही शिक्षकों को भी प्रतिकूल प्रविष्टि दी जाती है, जिससे उनकी पदोन्नति, चयन प्रोन्नत वेतनमान और स्थानांतरण के लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं। संघ ने इन सबके मद्देनजर माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों को एनपीआर तैयार करने की जिम्मेदारी से अलग करने का आग्रह किया है।
एनपीआर के लिए 458 कर्मी तैनात
एनपीआर तैयार करने के काम में चंपावत जिले में कुल 458 कर्मी तैनात किए गए हैं, इसमें बड़ी संख्या में शिक्षक भी शामिल हैं। प्रभारी जिलाधिकारी जेएस राठौर ने बताया कि चंपावत तहसील में 88, लोहाघाट में 124, पाटी में 90, टनकपुर तहसील में 94, चंपावत नगर पालिका क्षेत्र में 9, लोहाघाट में 13 और टनकपुर पालिका क्षेत्र में 30 कर्मी तैनात किए गए हैं। ये कर्मी 17 नवंबर से 16 दिसंबर तक घर-घर जाकर 2011 की जनगणना में भरे गए एनपीआर डेटा को अपडेट करेंगे। साथ ही मोबाइल नंबर, राशन कार्ड और आधार कार्ड नंबर को एनपीआर फार्म में भरेंगे।