अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत जिला पुस्तकालय में छात्र-छात्राओं का संवाद हुआ। इस दौरान युवाओं ने बुराई के खिलाफ लड़ाई और भविष्य गढ़ने के लिए पढ़ाई को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया। इस दौरान सीएए के प्रावधानों, इसे लेकर हो रहे विरोध-समर्थन, महिला सुरक्षा, आधुनिक शिक्षा, शुल्कविहीन प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने पर चर्चा हुई।
रविवार को जनकवि प्रकाश जोशी शूल के संचालन में हुए संवाद में वक्ताओं ने कहा कि सीएए आने से तीन पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को हिंदुस्तान में आने का मौका दिया जाना ठीक है लेकिन इससे देश के सीमित संसाधनों पर मार पड़ेगी। काननू में धर्म व जाति के नाम का उल्लेख करने से संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार पर चोट की बात भी कही गई।
पुस्तकालय प्रभारी डॉ. वीएस मेहता ने युवाओं को अपराजिता की शपथ दिलाई। इस मौके पर 13 छात्र-छात्राओं ने शपथ पत्र भरे। संवाद में नरेश चंद, नवनीत सिंह, पीयूष तड़ागी, दीपक कुमार, राहुल, पीयूष पंत, संगीता खाती, जीवन जोशी, सी थ्वाल, अक्षय सक्टा, शेखर पांडेय, पूजा ओली और बलजीत शामिल थे।
अनेक कारणों से छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए अक्सर बाहर नहीं जा पाती हैं। इसके मद्देनजर स्थानीय महाविद्यालयों में आधुनिक विषय और पर्याप्त स्टाफ की तैनाती होनी चाहिए। पूजा ओली।
हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ दुष्कर्म के बाद हुई हत्या से महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे। अब निर्भया कांड के गुनाहगारों को फांसी की सजा के एलान से कुछ राहत जरूर मिलेगी। संगीता खाती।
बेरोजगार युवकों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन भरने और पुस्तकों को खरीदने और परीक्षा केंद्र तक जाने में काफी खर्च होता है। इन परीक्षाओं को निशुल्क करने व निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाए। जीवन जोशी।
काबिलियत के बावजूद सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर सिकुड़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में युवाओं को स्वरोजगार के लिए उच्च स्तरीय निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाए। नरेश चंद।