चंपावत जिले के सबसे पुराने स्वामी विवेकानंद राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विधि संकाय का सपना अब भी अधूरा रहा है। छह साल पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री की ओर से किए गए एलान पर कार्य एक भी कदम आगे नहीं बढ़ सका है और विधि संकाय का पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसके चलते यहां के लोगों को कानून की पढ़ाई के लिए दूसरे जिलों के कॉलेज में अतिरिक्त खर्च करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
अक्तूबर 2013 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा ने क्षेत्र दौरे में छात्रों की मांग पर विधि संकाय खोलने की घोषणा की गई थी। तब छात्र व युवाओं में कानून की पढ़ाई सुलभ होने की उम्मीद जगी थी लेकिन छह साल से अधिक का वक्त बीतने के बावजूद विधि संकाय को लेकर कॉलेज के पास एक पत्र तक नहीं आया है।
छात्रों का कहना है कि वकालत के पेशे के अलावा विधि से संबंधित सरकारी और निजी क्षेत्रों में नौकरी की बेहतर गुंजाइश के चलते विधि की पढ़ाई के प्रति खासी दिलचस्पी है लेकिन यहां सबसे नजदीक में 123 किलोमीटर दूर अल्मोड़ा में विधि संकाय है। यहां पढ़ने के लिए खर्च जुटा पाना हर किसी छात्र के सामर्थ में नहीं है।
छात्र लगातार उठाते रहे आवाज
लोहाघाट (चंपावत)। छात्र नेताओं का कहना है कि कॉलेज में विधि संकाय, पुस्तकालय और नए विषयों को खोले जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। आंदोलन के चलते कुछ समस्याओं का समाधान भी हुआ है। छात्र नेताओं का कहना है कि विधि संकाय के लिए वे उच्च शिक्षा मंत्री से वार्ता करेंगे।
विधि संकाय को लेकर निदेशालय या शासन से कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए निदेशालय स्तर पर पत्र भेजे जाते रहे हैं। वहीं पीजी स्तर पर गणित, गृह विज्ञान और भौतिक विज्ञान का पैनल हो गया है, अगले सत्र से इन विषयों के खुलने की उम्मीद है। डॉ. सुशील कुमार गुरुरानी, प्राचार्य, पीजी कॉलेज, लोहाघाट।