प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 मई के नेपाल दौरे के मद्देनजर भारत-नेपाल के बीच 1991 में हुई संधि पर अमल होने लगा है। इसी के तहत टनकपुर बैराज से नेपाल को जोड़ने वाली 1.3 किमी सड़क निर्माण की कवायद ने गति पकड़ ली है। सोमवार को प्रदेश के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने पहले बनबसा में यूजर एजेंसी एनएचपीसी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों की बैठक ली और बाद में टनकपुर बैराज का निरीक्षण किया। अपर मुख्य सचिव ने प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए अधिकारियों को 9 मई तक डीपीआर, वन भूमि हस्तांतरण आदि सभी कार्यवाही पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को यहां पहुंचे अपर मुख्य सचिव ने पहले एनएचपीसी गेस्ट हाउस में जिला प्रशासन, एनएचपीसी, लोनिवि की पीआईयू इकाई, वन विभाग के अधिकारियों की बैठक ली। इसके बाद उन्होंने टनकपुर बैराज से नेपाल को जोड़ने वाली सड़क का निरीक्षण किया। उन्होंने यूजर एजेंसी एनएचपीसी, निर्माण एजेंसी लोनिवि की पीआईयू और वन विभाग को संयुक्त रूप से सड़क और चैनल निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने एनएचपीसी को निर्माण से पूर्व वन अधिनियम के निस्तारण में सहयोग करने, प्रभागीय वनाधिकारी हल्द्वानी को वन भूमि हस्तांतरण लोनिवि की पीआईयू इकाई को डीपीआर तैयार कर हर हाल में रिपोर्ट शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण में किसी तरह का विलंब माफ नहीं किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी कमलप्रीत, वन संरक्षक डॉ. पराग मधुकर धकाते, जिलाधिकारी डॉ. अहमद इकबाल, एसपी धीरेंद्र गुंज्याल, एसई लोनिवि हरीश पांगती, एनएचपीसी के महाप्रबंधक रईस मियां, ईई लोनिवि पीआईयू इकाई राजेश पुनेठा, डीएफओ हल्द्वानी डॉ. चंद्रशेखर सनवाल, डीएफओ चंपावत केएस बिष्ट, एसडीएम अनिल चन्याल, एसडीएम चंपावत सीमा विश्वकर्मा, ईई एनएच एलडी मथेला, तहसीलदार पूनम पंत आदि अधिकारी मौजूद थे।
बैराज से नेपाल को सिंचाई के लिए चैनल भी बनाकर देना है
टनकपुर जल विद्युत परियोजना निर्माण के वक्त 1991 में नेपाल के साथ हुए समझौते के तहत भारत सरकार को टनकपुर बैराज से 1.3 किमी सड़क का निर्माण ही नहीं, बल्कि सिंचाई के लिए नेपाल को इतनी ही लंबी नहर भी बनाकर देनी है। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता हरीश पांगती के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए 2.34 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित होगी। सड़क की चौड़ाई 9 से 18 मीटर होगी। इसके निर्माण में क्षतिपूर्ति को छोड़ 5.13 करोड़ रुपये खर्च होंगे।