बनबसा (चंपावत)। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बनबसा में बीएडीपी मद से करीब 40 लाख रुपये की लागत से पिलर नंबर सात के पास बनने वाले स्वागत द्वार का एसएसबी की डीजी अर्चना रामासुंदरम ने शिलान्यास किया। उन्होंने स्वागत द्वार को दोनों देशों के बीच मैत्री का प्रतीक बताया। स्वागत द्वार पर दोनों देशों के दर्शनीय स्थलों और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी अंकित होगी।
इससे पहले यहां पहुंचने पर एसएसबी जवानों ने डीजी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। उनके आगमन पर रानीखेत से आए एसएसबी बैंड ने एसएसबी की धुन बजाकर लोगों का स्वागत किया। शिलान्यास से पहले डीजी ने एसएसबी 57वीं वाहिनी की ए कंपनी मुख्यालय में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों से सुझाव भी लिए। बाद में उन्होंने नेपाल के अधिकारियों के साथ मीटिंग की। इस मौके पर एसएसबी के आईजी श्याम सिंह, कमांडेंट केसी राना, जेपी राना, टूआईसी हरि प्रकाश, एओ डीके थोंगन, डिप्टी कमांडेंट संजीव, असिस्टेंट कमांडेंट गौतम सागर के अलावा नेपाल के सीडीओ मनोहर प्रसाद खनाल, एपीएफ के डीआईजी राजेश श्रेष्ठा एसपी तारादत्त पंत आदि मौजूद थे।
एसएसबी के डीजी अर्चना रामा सुंदरम ने कहा कि एसएसबी को भारत-नेपाल सीमा पर करीब 1751 किमी और भूटान सीमा पर करीब 699 किमी की सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली है। इसके लिए एसएसबी की 73 बटालियन सीमा सुरक्षा कार्य पर लगी हैं। उत्तराखंड से लगी नेपाल सीमा पर कर्मियों की परेशानियों से अवगत होंगी।
खास तौर पर महिला कर्मियों की परेशानियों के बारे में उन्होंने मालूमात की। डीजी ने बताया कि एसएसबी को नेपाल, भूटान सीमा की सुरक्षा के अलावा तस्करी पर अंकुश लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण में एसएसबी खरी उतर रही है। कहा कि एसएसबी को ह्यूमन ट्रैफिकिंग, ड्रग्स, हथियार, मूर्तियां, पशु तस्करी आदि पर अंकुश लगाने की भी जिम्मेदारी मिली है।
एसएसबी सीमा पर नागरिकों से भी संपर्क कर उनकी समस्याओं से भी रूबरू होती है। सीमा पर निर्धन, दलित वर्ग की कन्याओं को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत शिक्षित करने का भी प्रयास कर रही है। बनबसा बीओपी में कार्यरत 37 महिला कर्मियों की दिक्कतों और उनकी ड्यूटी में आने वाली बाधाएं भी पूछीं।