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स्मार्ट सिटी बाद में, पहले क्लीन तो बने

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स्मार्ट सिटी बाद में पहले क्लीन सिटी तो बने
चंपावत में कूड़ा निस्तारण की समस्या का कोई समाधान नहीं
07 टन कूड़े को सेलाखोला में सड़क किनारे फेंका जा रहा है रोज
अमर उजाला पड़ताल
कूड़े से आफत-1
चंद्रशेखर जोशी
चंपावत। चंपावत को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना पूरा होना तो दूर, ग्रीन सिटी और क्लीन सिटी बनाना भी मुश्किल हो रहा है। शहर में कूड़ा निस्तारण का भी कायदे का बंदोबस्त नहीं है। अब भी सड़क किनारे कूड़ा फेंकना मजबूरी बना है।
सितंबर 1997 में जिला बनने के 25 साल से अधिक बीतने के बाद भी चंपावत में कूड़े के निस्तारण का समुचित प्रबंध नहीं है। रोजाना सात टन जैविक और अजैविक कूड़ा फेंकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मुख्यालय में ट्रंचिंग ग्राउंड तक नहीं है। यहां से तीन किमी दूर उद्यान विभाग की नर्सरी के पास सेलाखोला में सड़क किनारे शहर का कूड़ा फेंका जाता है। इससे न केवल नर्सरी पर खतरा बना रहता है बल्कि आवाजाही करने वालों को भी दुर्गंध से जूझना पड़ता है। चंपावत से खेतीखान जाने वाली इसी सड़क से सर्किट हाउस का रास्ता भी जुड़ा है।
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नगर पालिका के दावे
अब कूड़ा निस्तारण के स्थायी उपाय की बात कही जा रही है। नगर पालिका का कहना है कि ट्रंचिंग ग्राउंड के बजाय ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। ट्रीटमेंट से कूड़े का आधुनिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए सेलाखोला में कूड़ेघर के पास की जमीन चयनित हो चुकी है। संवाद
फोटो 25 सीपीटी 04पी
आठ साल पहले लगी कांपैक्टर मशीन, चले बगैर हो गई खराब
चंपावत। जुलाई 2014 में आठ लाख रुपये से लगी कांपैक्टर मशीन चलने से पहले ही खराब हो चुकी है। इसे सुधारा नहीं जा सका है। कांपैक्टर मशीन का काम पॉलीथिन और प्लास्टिक को छोटा रूप देकर निस्तारित करना था। यह मशीन शुरू तो नहीं हो सकी लेकिन अब इस मशीन में खामी आ गई है। पॉलीथिन और प्लास्टिक के कचरे को निस्तारित करने के लिए सेलाखोला के पास कांपैक्टर मशीन लगाई गई थी लेकिन आठ साल बाद भी यह कभी उपयोग में नहीं लाई जा सकी। अब इस मशीन में तकनीकी खामी आ गई है। ईओ चंद्रशेखर शर्मा का कहना है कि कांपैक्टर मशीन को तकनीकी टीम के जरिये ठीक कराया जाएगा। संवाद
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फोटो 25 सीपीटी 05पी
कोट
चंपावत में ट्रंचिंग ग्राउंड के बजाय कूड़े के निस्तारण के लिए ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा। इसके लिए वन पंचायत की 50 नाली जमीन नगर पालिका को हस्तांतरित हो चुकी है। इसके लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। मंजूरी के बाद तीन करोड़ रुपये के ट्रीटमेंट प्लांट का काम शुरू होगा। - चंद्रशेखर शर्मा, ईओ, नगर पालिका, चंपावत।
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