टनकपुर (चंपावत)। पूर्णागिरि मेला स्थगित होने से पूर्णागिरि धाम में सन्नाटा पसरा हुआ है। भारत-नेपाल सीमा पर भी सुनसानी छा गई है। नेपाल सीमा पर सीमा सील जैसे हालात बने हुए हैं।
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के मद्देनजर पूर्णागिरि मेले स्थगित होने की जानकारी न होने से अभी भी कई श्रद्धालु पूर्णांगिरि के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। जिन्हें प्रशासन द्वारा वापस लौटाया जा रहा है। पूर्णागिरि आने वाले श्रद्धालुओं के नेपाल जाने पर भी रोक लगाई गई है, लेकिन सीमा पर दोनों ओर के स्थानीय लोगों के आने जाने पर फिलहाल कोई प्रतिबंध नहीं है। लोगों को स्वास्थ्य जांच के बाद ही आवाजाही की अनुमति दी जा रही।
सीमा से दो सौ लोगों ने की आवाजाही
टनकपुर। टनकपुर सीमा पर बृहस्पतिवार को भारत-नेपाल के बीच सिर्फ दो सौ लोगों ने ही आवाजाही की। बैराज पर एसएसबी बीओपी के पास स्थापित कोरोना जांच केंद्र में तैनात टीम के चिकित्साधिकारी डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि बाबा सिद्धनाथ के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षा एजेंसियों द्वारा नेपाल नहीं जाने दिया। सीमा पर प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य की गहनता से जांच के बाद ही उसे आवाजाही की अनुमति दी जा रही है।
मेले के लिए आया फोर्स वापस भेजा
टनकपुर। सीओ विपिन चंद्र ने बताया कि पूर्णागिरि मेला स्थगित होने के बाद मेले की सुरक्षा के लिए आए फोर्स को वापस भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि एसडीआरएफ को फिलहाल मेला क्षेत्र में ही रोका गया है। टनकपुर कोतवाली और ठुलीगाड़ थाने का फोर्स ही पूर्णागिरि क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को देखेगा।
वापस होंगे मेडिकल कालेज के डाक्टर
बनबसा (चंपावत)। कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए तहत हल्द्वानी स्थित मेडिकल कालेज से यहां भेजे गए डाक्टर जल्द वापस लौटेंगे। एसीएमओ डा. एसएस ह्यांकी ने बताया कि मेडिकल कालेज के प्राचार्य ने कहा है कि डाक्टरों को पूर्णागिरि मेले के तहत बनबसा और टनकपुर भेजा गया था। प्राचार्य ने मेला रोक दिए जाने का हवाला देते हुए डाक्टरों को वापस बुलाने के निर्देश दिए हैं।