बीते वित्त वर्ष की जिला योजना में शासन से धन मिलने की गति बेहद ढीलीढाली रही। इसके चलते कई विभागों के कामों पर ब्रेक पर लगा रहा। पिछले वित्त वर्ष में महज 59.63 प्रतिशत रकम ही रिलीज हो सकी। 2016-17 के जिला प्लान में शासन से 60 प्रतिशत से भी कम रकम अवमुक्त हुई है।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी नंदाबल्लभ बचखेती ने बताया कि 49.61 करोड़ रुपये की प्रस्तावित जिला योजना में से 29.58 करोड़ रुपये शासन से रिलीज हुए। लोनिवि ने सड़क व पुलों के लिए 11.11 करोड़ में से महज 6.54 (58.84 प्रतिशत) ही रिलीज हुए। इस कारण लोनिवि के 149 कार्यों में से 15 काम शुरू भी नहीं हो सके हैं।
इसी तरह जल निगम में 3.95 करोड़ रुपये में से महज 2.11 करोड़ रिलीज हुए। धन की कमी के चलते 54 कामों में से 22 काम शुरू भी नहीं हो पाए है। सबसे कम 40 प्रतिशत रकम सेवायोजना विभाग को मिली। विभाग को दो लाख रुपये से महज 80 हजार ही मिल सके, जबकि चिकित्सा व स्वास्थ्य (85 लाख) व महिला कल्याण (11 हजार) को 100 प्रतिशत रकम शासन से रिलीज हुई।
विभाग अनुमोदित परिव्यय रिलीज रकम (लाख रुपये) रिलीज रकम प्रतिशत
जल निगम 395 211 53.42
पर्यटन 200 107.5 53.75
खादी व ग्रामोद्योग 20 10.8 54
वन विभाग 100 54 54
उद्यान 88.84 48 54.03
लघु डाल 135.94 73.5 54.07
नलकूप खंड 130 70.32 54.09
सहकारिता 48.95 26.5 54.14
लघु सिंचाई 40.55 22 54.25
वैकल्पिक ऊर्जा 109.8 60 54.64
कृषि 71.23 39 54.75
ग्रामीण व लघु उद्योग 19.13 10.5 54.89
पिछले साल रिलीज हुए थे 40.85 करोड़
पिछले साल 2015-16 में जिला योजना के लिए चंपावत का आवंटन 40.85 करोड़ था। इसमें से 40.84 करोड़ रुपये का बाकायदा उपयोग किया गया। महज उद्यान विभाग के एक हजार रुपए खर्च नहीं हो सके थे।