चंपावत। बैकुंठ चतुर्दशी पर लधिया घाटी के ग्राम पंचायत खरही नाखुड़ा गांव से मल्ली खरही तक भगवान शिव-पार्वती और गणेश की शोभायात्रा निकली। चंद राजाओं द्वारा 16वीं सदी में मंदिर में अर्पित किए गए चांदी के छत्र भी शोभायात्रा में परंपरागत रूप से लगाया गया था। पुजारी पंडित मोहन चंद्र शर्मा ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इससे पूर्व शनिवार रात को जागरण हुआ। साथ ही अब अगले एक साल के लिए बालादत्त शर्मा यहां के पुजारी होंगे। अलबत्ता कोरोना के चलते मेले में पहली बार दास डोली की परंपरा नहीं निभाई जा सकी।
सामाजिक कार्यकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि कोराना महामारी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शोभायात्रा में खासे कम लोग थे। रविवार रात को शिव डोला 10 किमी दूर लधौनधुरा की चोटी में ले जाया गया। मेला कमेटी के अध्यक्ष सूरज सिंह, प्रधान सुनीता बोहरा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मुकेश महराना, अशोक भट्ट, जोत सिंह, पान सिंह, बालादत्त शर्मा, प्रताप सिंह, प्रेम सिंह, दिलीप सिंह, श्याम सिंह, दीवान सिंह बोहरा, उमेद सिंह, शिवदत्त भट्ट आदि व्यवस्थाओं में जुटे रहे।
देवरथ निकले, लोक देवताओं ने दिया आशीर्वाद
लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष महाकाली नदी के तट पर लगने वाले नगरूघाट मेला स्थगित होने से सीमावर्ती क्षेत्र के लोग और व्यापारी मायूस रहे। क्षेत्र का सबसे बड़ा मेला होने के चलते यहां भारत के गांवों के अलावा नेपाल के भी कई गांवों के श्रद्धालु भगवान नागार्जुन का आशीर्वाद लेने पहुंचते थे। शनिवार रात को गांवों में लगी देव गद्दी लगाई गई, जिसमें लोक देवताओं ने अवतरित होकर लोगों के कष्टों का निवारण कर आशीर्वाद दिया।
रविवार को देवरथों का मंदिर की ओर जाने का क्रम शुरू हुआ। देवरथों और जत्थों को मंदिर की ओर ले जाने में गांवों से 10-10 लोग ही शामिल हुए। देर रात सल्टा के देव डांगर श्रद्धालुओं के कंधों में सवार होकर मंदिर परिक्रमा के लिए निकले। उसके पीछे बगोटी, और जमरसों के देव डांगर श्रद्धालु देव डांगरों को कंधों में बैठाकर मंदिर की ओर बढ़े। नागार्जुन देवता अवतरित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देकर चल रहे थे। बगौटी सल्टा, जमरसों से आए जत्थों का आपस में मिलन हुआ। जत्थों के आगे हाथों में लाठी लिए युवक और पीछे महिलाएं मांगलिक गान करते चल रही थी। मंजपीपल, सुनकुरी, देवकूडा, सुल्ला आदि गांवों के जत्थों ने मंदिर की परिक्रमा की। महोत्सव समिति के अध्यक्ष जगदीश कलौनी के नेतृत्व में डॉ. सतीश पांडेय, सचिव भुवन भट्ट, विक्रम सामंत, कमल बोहरा, रमेश चंद, बहादुर चंद, ब्रदी सिंह सौन, देव सिंह, दीनानाथ पांडेय, मोहन चंद, बाबू सिंह, पुष्कर बोहरा आदि सहयोग कर रहे हैं।