खनन कारोबारियों ने शारदा से खनिज निकासी तेज करने को शनिवार से दो चक्कर निकासी कर दी है। उधर, कुमाऊं मंडल विकास निगम ने भी उचौलीगोठ 28 हेक्टेयर राजस्व क्षेत्र से खनिज की निकासी शुरू कर दी है।
शासन से अनुमति मिलने के बाद वन विकास निगम के खनन प्रभाग ने इस बार एक दिसंबर से विधिवत खनन गेट खोल दिया था, लेकिन रायल्टी की दरों को लेकर विवाद और सरकार द्वारा खनिज भंडारण नियमावली में नई शर्तें लागू किए जाने से कारोबारियों ने खनिज निकासी नहीं की। कारोबारियों का कहना था कि खनिज भंडारण की अनुुमति सिर्फ स्टोन क्रसर मालिकों और खनन पट्टाधारकों को ही देने से कारोबार प्रभावित होगा। विरोध के चलते शासन ने रायल्टी की दर तो घटा दी, लेकिन भंडारण की शर्तों में संशोधन नहीं किया है। फिर भी मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद कारोबारियों ने छह जनवरी से खनिज की निकासी शुरू की है।
शारदा से इस बार 19 लाख घनमीटर खनिज निकासी की अनुमति मिली है। खनिज निकासी की मात्रा टनकपुर बैराज के डाउन स्ट्रीम से 11 लाख घनमीटर और अप स्ट्रीम से 8 लाख घन मीटर निर्धारित है। खनिज निकासी के लिए 224 शक्तिमान ट्रक पंजीकृत हैं। अब तक हर दिन प्रति ट्रक एक चक्कर निकासी कर रहे थे, लेकिन शनिवार से यूनियन ने दो चक्कर निकासी कर दी है। यूनियन अध्यक्ष योगी ज्याल का कहना है कि निकासी की मात्रा ज्यादा तय है और हर दिन एक चक्कर निकासी से तय खनिज की निकासी नहीं की जा सकती है। कुमाऊं मंडल विकास निगम के ठेकेदार योगेंद्र सिंह ज्याल ने बताया कि 28 हेक्टेयर से उप खनिज निकासी की मात्रा 139650 मीट्रिक टन एक साल के लिए निर्धारित है।
खनिज निकासी करते ट्रकों का रास्ता बदला जाए
हनुमानगढ़ी के ग्रामीणों ने शारदा के अप स्ट्रीम से खनिज निकासी कर रहे शक्तिमान ट्रकों की निकासी का रास्ता बदलने की मांग उठाई है। एसडीएम से मिले ग्रामीणों ने नायकगोठ धर्मकांटे के पास अतिक्रमण कर बनी झोपड़ियों को नहीं हटाने और शवदाह के लिए भूमि का चयन गांव से दूर करने का भी आग्रह किया है। ग्राम प्रधान रेनू देवी के नेतृत्व में तहसील पहुंचे ग्रामीणों ने एसडीएम नरेश दुर्गापाल के समक्ष अपनी समस्या रखी। कहा कि हनुमानगढ़ी मार्ग संकरा है और नायकगोठ कांटे से निकासी कर रहे ट्रक इसी मार्ग से आ-जा रहे हैं, जिससे दुर्घटना का भय बना रहता है। उनका कहना था कि नायकगोठ कांटे के पास अतिक्रमण कर बनाई गई झोपड़ियों को हटाने के बजाय शक्तिमान ट्रकों का रास्ता बदला जाना चाहिए। इस दौरान पूर्व प्रधान जीत सिंह, लीलाधर, बालम सिंह, विमला देवी, मीना देवी, कमला देवी, नीरू देवी, गौरी देवी, हेमा देवी, तारा देवी, लक्ष्मी देवी, मधु देवी आदि मौजूद थे।