तीन साल पहले आपदा की भेंट चढ़ा शारदा स्नानघाट के हालात अब भी नहीं सुधर पाए हैं। मां पूर्णागिरि के दर्शन को आने वाले श्रद्धालु को भी घाट के बिगड़े मौजूदा स्वरूप में स्नान करने के लिए खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। घाट के हाल ऐसे हैं कि यात्रियों के लिए अस्थाई तौर पर बेहतर सुविधाएं भी मुहैया नहीं कराई जा सकती है।
आपदा मद से 13.7 करोड़ रुपये की लागत से पक्के घाट का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन शासन से मंजूरी नहीं मिलने के कारण दो साल से स्नानघाट निर्माण की कवायद लंबित पड़ी है। इधर श्रद्धालु भी चाहते हैं कि यहां भी हरिद्वार की तर्ज पर सीढ़ीनुमा शानदार स्नानघाट और पूजा-अर्चना के लिए मां शारदा का मंदिर बने। वहीं सुरक्षित स्नान के भी इंतजाम हो।
कासगंज से मां पूर्णागिरि के दर्शन को आई प्रिया वार्ष्णेय का कहना है कि मां पूर्णागिरि धाम के कारण हरिद्वार में गंगा स्नान की तरह शारदा नदी में स्नान का भी विशेष महत्व है, लेकिन यहां स्नान की बेहतर सुविधा नहीं है। चैंजिंग रूम न बने होने से महिलाओं को खुले में कपड़े बदलने पड़ते हैं।
एटा से आए सुमित का कहना है कि वह तीन साल से लगातार मां पूर्णागिरि के दर्शन के लिए आ रहे हैं। यहां पहले बना स्नानघाट उतना अच्छा तो नहीं था, लेकिन बदहाल घाट से तो लाख गुना बेहतर था। यहां बनारस और हरिद्वार की तरह बेहतर स्नान घाट ही नहीं मां शारदा का मंदिर भी बनना चाहिए।
कासगंज के अखिलेश का कहना है कि आपदा से घाट क्षतिग्रस्त हुए दो साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन घाट के हाल नहीं सुधारे जा सके। यहां बेहतर स्नानघाट बने। जिसमें यात्रियों के विश्राम, शौचालय आदि की स्थायी व्यवस्थाएं भी हो।
कासगंज की इंदू का कहना है कि वह परिजनों के साथ हरिद्वार भी दर्शन के लिए गई है। वहां सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया होती है। मां पूर्णागिरि के दर्शन और शारदा में स्नान के लिए भी काफी संख्या में लोग आते हैं, लेकिन घाट में कोई सुविधा नहीं है। सुविधा के नाम विश्राम टीनशेड ही बना है। उसकी भी क्षमता कम है।
पालिका अध्यक्ष लक्ष्मी पांडेय का कहना है कि आपदा में घाट क्षतिग्रस्त होने के बाद ही पालिका ने 25 जून 2013 को यात्री विश्राम गृह, घाट निर्माण आदि के लिए 13 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया था। इसके बाद घाट पुनर्निर्माण के लिए फिर 21 अप्रैल 2015 को भी 11.7 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया। शासन ने इस कार्य के लिए सिंचाई विभाग को कार्यदायी विभाग बनाया है। उम्मीद है कि शासन से मंजूरी मिलने पर अगले वर्ष तक घाट का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।