लधिया घाटी के गांवों में इन दिनों मौसम की मार भारी पड़ रही है। रीठा और आसपास के कई गांवों में लोग मौसमी बुखार, खांसी, बदन दर्द, कमजोरी से ग्रस्त हैं। इन रोगियों की अस्पताल में संख्या भी बढ़ रही है, लेकिन डॉक्टरों के नहीं होने से लोग परेशान हैं।
लधिया घाटी में रीठा साहिब, भिंगराड़ा और टांण में सरकारी अस्पताल हैं, लेकिन डॉक्टर एक भी जगह नहीं है। रीठा साहिब को छोड़ अन्य जगह तो फार्मेसिस्ट भी नहीं है। रीठा साहिब अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के फार्मेसिस्ट दीपक गिरि गोस्वामी का कहना है कि ज्यादातर लोग मौसमी बुखार से ग्रस्त हैं। अस्पताल में मरीजों की औसतन संख्या 8 से बढ़कर 34 तक पहुंच गई है।
काफी लोग लधिया घाटी के अस्पतालों में डॉक्टर न होने और पैथोलॉजी जांच की सुविधा नहीं होने से लोहाघाट और चंपावत जाकर इलाज कराने को मजबूर हैं। सामाजिक कार्यकर्ता खीमांनद बिनवाल सहित इलाके के कई लोगों का कहना है कि चिकित्सकीय सुविधा नहीं होने से लोगों को परेशानी हो रही है। वह लोहाघाट और चंपावत के अस्पताल जाकर इलाज कराने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने इस इलाके में कम से कम एक डॉक्टर की तैनाती करने की मांग की है।