चंपावत। पेयजल संकट के बीच जिला मुख्यालय में टैंकर और पिकअप के जरिए नगर के लोगों को रोजाना 27 हजार लीटर पेयजल की सप्लाई की जा रही है, मगर पानी की भारी कमी के बीच ये भी नाकाफी साबित हो रहा है।
जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा ने बताया कि रोजाना तीन हजार लीटर का टैंकर एक चक्कर और दो हजार लीटर क्षमता की 12 पिकअप से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। यह पानी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर धौन के स्रोत से लाया जा रहा है।
चंपावत शहर को रोजाना 16 लाख लीटर पेयजल चाहिए, मगर मिल रहा है चार लाख लीटर से भी कम। स्रोतों में गिरावट आने से नलों से मिलने वाला पानी भी नियमित रूप से नहीं मिल रहा है। जल संस्थान शहर में अधिकांश जगह एक दिन छोड़कर पानी दे रहा है।
लोहाघाट (चंपावत)। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। जल स्तर में कमी आने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनी 80 पेयजल योजनाओं में से तीन योजनाएं ठप हो चुकी है, जबकि शेष योजनाओं के जल स्तर में 78 फीसदी तक कमी आ गई है। विभाग द्वारा अब तीसरे दिन जलापूर्ति की जा रही है। पेयजल संकट के चलते लोग गाड़-गधेरों का पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं।
गांवों की पूरी निर्भरता नौलों एवं हैंडपंपों में टिकी है। हैंडपंप कुछ समय चलने के बाद जहां पानी देना बंद कर दे रहे हैं, वहीं नौलों का जल स्तर रसातल में पहुंच गया है। लोग पानी के लिए नौलों में बारी लगा रहे हैं। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब लोग रात-दिन नौलों में ही दिखाई दे रहे हैं तथा नौलों में खाली बर्तनों की लंबी लाइन लगी रहती है।
जलकल अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार रौंतली माहरा, चौड़ी की बनगांव योजना, फोर्ती की पेयजल योजनाएं ठप पड़ गई हैं। सुंई, खूना मलक, फोर्ती, चौड़ी, बनगांव, प्रेमनगर, राईकोट, पुलहिंडोला, चमदेवल, कलीगांव, सेरीगैर आदि में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है। पेयजल का सिंचाई में उपयोग करने अथवा पेयजल लाइनों में टुल्लू पंप लगाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।