बीएसएनएल संचार व्यवस्था को दुरुस्त करने के बजाय टावरों को ही हटाने का फरमान जारी कर रहा है। तीन वर्ष पहले आकाशीय बिजली गिरने से कुल्याल गांव स्थित टावर की मशीनें फुंक गई थी, यह तब से बंद पड़ा हुआ है, जिससे लधिया घाटी क्षेत्र में बीएसएनएल की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। बीएसएनएल अल्मोड़ा मंडल के एजीएम एससी पांडेय के अनुसार कुल्याल गांव समेत सूखीढांग के पास स्थित टावर को समेटने के आदेश जारी कर दिए हैं। इन टावरों को लगाने के बाद विभाग को बहुत कम आय हुई है।
उनका कहना है कि एक टावर स्थापित करने में लगभग 60 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसमें प्रतिमाह तीन लाख रुपये रखरखाव में खर्च करने पड़ते हैं। बीएसएनएल प्रत्येक छह माह में हर क्षेत्र के टावरों की समीक्षा करता है। अल्मोड़ा मंडल में कुल्याल गांव और सूखीढांग के साथ 11 अन्य स्थानों के टावर समेटे जा रहे हैं। इधर, मडलक क्षेत्र में बीएसएनएल की सेवाएं नहीं मिलने के बारे में उनका कहना है कि पुलहिंडोला में सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को बीएसएनएल सुविधाएं दिए जाने के लिए ही टावर लगाया गया था, लेकिन उसका लाभ यहां के लोगों को न मिलकर नेपाल सीमा के लोगों को मिलने से सुरक्षा की दृष्टि से उसका रेंज कम कर दिया गया है। मंडल स्तर से टावर की रेंज बढ़ाया जाना संभव नहीं है।