जिला भेषज सहकारी संघ का अगले वित्त वर्ष के लिए 13.6 लाख रुपये का बजट सर्वसम्मति से पारित हो गया। अध्यक्ष मुन्नी जोशी की गैर मौजूदगी में कांति बल्लभ पुनेठा की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को हुई संघ की वार्षिक सामान्य बैठक (एजीएम) में सचिव आरके भारती ने बताया कि संघ को सबसे ज्यादा सात लाख रुपये जड़ी-बूटी संग्रहण एवं विपणन से मिलेंगे। वहीं, ब्याज से 6.5 लाख की कमाई होगी। खर्च में सबसे अधिक आठ लाख वेतन और मजदूरी में व्यय होंगे।
सदस्यों ने नाप भूमि से उत्पादित तेजपात सहित कई जड़ी-बूटी की निकासी के सरलीकरण पर जोर दिया। पूर्व की तरह वन विभाग से अनुमति लेकर भेषज संघ छिलका, गुलिया का संग्रहण कार्य पर भी सहमति जताई गई। बैठक में भेषज संघ के संस्थापक अध्यक्ष हरगोविंद बोहरा, पूर्व ब्लाक प्रमुख बहादुर सिंह फर्त्याल, चंपावत साधन सहकारी समिति के अध्यक्ष विकास साह ने भेषज संघ की आय बढ़ाने के लिए जरूरी कदम उठाने पर जोर दिया।
सचिव भारती ने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष के लिए संघ की औषधीय प्रजातियों की नर्सरी के लिए जिला योजना में कटौती किए जाने से नर्सरी के संचालन में दिक्कत आ रही है। सदस्यों ने अगले वित्त वर्ष में इस राशि को बढ़ाने की मांग की है। जिला भेषज समन्वयक राकेश वर्मा की अनुपस्थित पर सदस्यों ने नाराजगी जताई। बैठक में भेषज संघ उपाध्यक्ष दीपा चौधरी, उमेश खर्कवाल, दिलीप मेहता, गणेश गिरि, नारायण दत्त गड़कोटी, अंबादत्त फुलारा, कै.बिंदु सिंह मौनी, भगवत साह, खीमानंद भट्ट आदि थे।
बूम रेंज से नहीं हुआ जड़ीबूटी का संग्रहण
वन विभाग द्वारा जड़ीबूटी संग्रहण के लिए चक्रीय प्रद्धति लागू किए जाने से 2015-16 में बूम रेंज का आवंटन किया गया है। लेकिन समिति का कहना है कि रेंज में जड़ी-बूटियों की मात्रा पर्याप्त नहीं होने से काम करना संभव नहीं था। सदस्य प्रहलाद नेगी ने उद्यान विभाग की तरह काश्तकारों को औषधीय प्रजातियों के पौध कलस्टर में वितरित करने का सुझाव दिया।