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कोरोना संकट से निपटने की कवायद

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चंपावत। जिले में लॉकडाउन के दौरान विभिन्न स्थानों से अपने अपने गांव लौटे सैकड़ों युवाओं को संभावित लॉकडाउन खत्म होने के बाद रोजगार से जोड़ने की कवायद शुरू हो गई है। संकट की इस घड़ी में बाहरी प्रदेशों में अपना रोजगार छोड़कर आए युवाओं के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की ओर से संचालित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) मददगार बनेगा।
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संस्थान की ओर से लॉकडाउन खत्म होने के बाद ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। संस्थान के निदेशक जनार्दन चिलकोटी कहते हैं कि युवा स्वरोजगार के जरिये पहाड़ में रहते हुए भी अपनी आजीविका का साधन जुटा सकते हैं। आज बहुत ऐसे कार्य हैं जिनको तकनीकी दृष्टि से अहम माना जाता है। उनका कहना है कि जहां पहाड़ के युवा मैदानी क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की रहने खाने की समस्याओं के अलावा डेंगू, पीलिया जैसी मौसमी बीमारियों से भी जूझते रहते हैं, वहीं कभी-कभी परिवार के साथ जाने पर घर में रह रहे वृद्ध माता-पिता की चिंता अलग से बनी रहती है। अब पहाड़ में भी बच्चों की शिक्षा के लिए भी अच्छे स्कूलों की उपलब्धता है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हो रहा है। लिहाजा घर पर रहकर भी स्वरोजगार से जुड़ा जा सकता है। इसके लिए आरसेटी केंद्र युवाओं की मदद को तैयार है।
सभी जिलों में हैं ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान
चंपावत। आरसेटी निदेशक जनार्दन चिलकोटी के अनुसार केंद्र सरकार के ग्रामीण मंत्रालय की ओर से सभी जिलों में आरसेटी खोले गए हैं। इनमें 18 से 45 वर्ष तक के ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनको अपना रोजगार स्थापित करने के लिए प्रेरित किया जाता है। प्रशिक्षण के बाद बैंकों से लोन दिलाया जाता है। प्रशिक्षण लेने के इच्छुक युवा संस्थान से संपर्क कर सकते हैं।
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इन व्यवसायों में दिया जाएगा प्रशिक्षण
चंपावत। आरसेटी की ओर से युवाओं को कैटरिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर, ईंट एवं ब्लॉक, बिल्डिंग पेंटिंग वर्क, वेल्डिंग वर्क, स्टील एल्यूमीनियम वर्क, ग्लास वर्क, सैलून, ब्यूटी पार्लर, कटिंग-टेलरिंग, फैशन डिजाइनिंग आदि व्यवसायों के साथ ही डेयरी, फलों की खेती, मत्स्यपालन, जैविक खेती आदि से संबंधित व्यवसायों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। संवाद
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