लोहाघाट (चंपावत)। छमनियांचौड़ स्थित रोडवेज डिपो कार्यालय का जर्जर भवन कर्मचारियों के लिए खतरे का सबब बना है। पिछले कुछ समय से भवन का प्लास्टर टूटकर गिरने लगा है। कर्मचारी अपनी जान को खतरे में डाल काम करने को मजबूर हैं।
रोडवेज डिपो कार्यालय का भवन 1983 में बना था। जर्जर हो चुके इस भवन की दशा बरसात में और खराब हो जाती है। लगातार छत से पानी तो टपकता ही है, दीवारों से भी पानी रिसने लगता है। कर्मचारियों ने कार्यालय की छत के ऊपर प्लास्टिक की पन्नी बिछा रखी है। भवन की खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह से सड़ चुके हैं। कई खिड़कियों के शीशे भी गायब हैं। कार्यालय में दो दर्जन से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। यहां फोरमैन कार्यालय में भी छत से प्लास्टर गिर रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि आंधी तूफान के वक्त कार्य करने में भय बना रहता है।
चारों ओर से खुली है डिपो कार्यशाला की सीमा
लोहाघाट (चंपावत)। रोडवेज डिपो कार्यशाला की सीमा चारों ओर से खुली है। इससे कार्यालय परिसर के बाहर लावारिस जानवरों का हुजूम लगा रहता है। रात में प्रकाश की व्यवस्था न होने से चौकीदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। (संवाद)
विभिन्न रूटों पर संचालित होती हैं 38 बसें
लोहाघाट (चंपावत)। रोडवेज के लोहाघाट डिपो में 38 बसों का बेड़ा है। यहां से प्रतिदिन दिल्ली, देहरादून, बरेली, हरिद्वार, गुरुग्राम, ऋषिकेश, नैनीताल, हल्द्वानी आदि स्थानों के लिए बसों का संचालन किया जाता है। रोडवेज के एजीएम नरेंद्र गौतम ने बताया कि डिपो से प्रतिदिन करीब 3.25 लाख रुपये आय हो रही है। उन्होंने बताया कि कोरोना काल के बाद व्यवस्था धीरे धीरे पटरी में आने लगी है। दिसंबर में डिपो की आय 70 लाख और जनवरी माह में 80 लाख रुपये रही। (संवाद)
कोट
कार्यालय भवन की मरम्मत की मांग उच्चाधिकारियों से की गई है। बजट की स्वीकृति मिलने के बाद पुनर्निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। खराब पड़ी लाइटों को जल्द सही कराया जाएगा।
- नरेंद्र गौतम, सहायक महाप्रबंधक, लोहाघाट