चंपावत। लोहाघाट डिपो पुरानी और खस्ताहाल हो चुकी बसों को ही सड़क पर दौड़ा रहा है। आए दिन ये बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं। डिपो की 32 में से 22 बसें पहाड़ पर चलने के सात लाख का मानक पूरा कर चुकी हैं। इसके बाद भी इन बसों को सड़क पर दौड़ाया जा रहा है।
उम्रदराज हो चुकी इन बसों के संचालन से यात्रियों की जान को भी हमेशा खतरा बना रहता है। बस कब खराब हो जाए कुछ नहीं कहा जा सकता है। लंबी या कम दूरी का संचालन हो, बस आए दिन रास्ते में खराब हो जाती हैं। पिछले एक माह में पांच बसें रास्ते में खराब हो चुकी हैं। रोडवेज के एजीएम नरेंद्र गौतम ने बताया कि नई बसों की मांग मुख्यालय को भेजी गई है। नई बस मिलने के बाद पुरानी बसों को मैदानी क्षेत्र में संचालित किया जाएगा। प्रत्येक बस को वर्कशॉप में जांच के बाद ही संचालित किया जाता है। संवाद
कोट
मानक पूरा करने के बावजूद पुरानी बस का संचालन करना सही नहीं है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर जरूरत के हिसाब से नई बस रोडवेज डिपो को उपलब्ध करानी चाहिए। ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके।
- केदार सिंह, चंपावत।
रोडवेज की पुरानी बस में सफर करने में डर लगता है। मानक पूरी कर चुकी बस से लोगों को यात्रा कराई जा रही है जो ठीक नहीं है। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए नई बसें डिपो को जल्द दी जानी चाहिए।
- संतोष, लोहाघाट।