चंपावत/लोहाघाट। राज्य में 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से शुरू हुए लॉकडाउन के 104 दिन बाद रविवार को रोडवेज की बस का हल्द्वानी तक संचालन हुआ। लोहाघाट डिपो की यह बस महज नौ यात्रियों के साथ रवाना की गई। 25 जून से लोहाघाट डिपो की दो बसों (एक नैनीताल और दूसरी हल्द्वानी) को चलाने के निगम मुख्यालय से आदेश हुए थे लेकिन यात्रियों की कमी से एक जुलाई तक बस चलाई नहीं जा सकी। पहली बस दो जुलाई को टनकपुर तक चलाई गई। इसमें लौटाफेरी में महज 11 यात्री मिले और किराए से मिली रकम से अधिक खर्च डीजल में लग गया। अलबत्ता लॉकडाउन के बाद पहली बार रविवार को हल्द्वानी तक बस संचालित की गई। लोहाघाट के सहायक मंडलीय प्रबंधक राजेंद्र कुमार का कहना है कि हल्द्वानी केे लिए भेजी गई इस बस में पांच यात्री लोहाघाट और चार यात्री चंपावत से सवार हुए। निगम मुख्यालय ने बस की निर्धारित क्षमता से 50 प्रतिशत सवारी होने पर बसों को संचालित करने की इजाजत दी है।
रोडवेज के टनकपुर डिपो ने दस दिन मेें कमाए दस लाख
टनकपुर (चंपावत)। रोडवेज के टनकपुर डिपो को बसों के संचालन से दस दिनों में पांच लाख रुपये की कमाई की है, जबकि बसों के संचालन में इससे अधिक खर्च करना पड़ा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही डिपो ने तीन और बसों का संचालन बढ़ाया है।
कोरोना के कारण तीन माह तक संचालन बंद रखने के बाद रोडवेज ने 25 जून से बसों का संचालन शुरू किया है। बसें चलने से यात्रियों को तो सुविधा मिलने लगी है, लेकिन रोडवेज को घाटा सहना पड़ रहा है। एआरएम (संचालन) केएस राणा ने बताया कि कोरोना से बचाव की गाइडलाइन का पालन कराते हुए बसें चलाई जा रही हैं। शुरू में हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर के लिए चार बसें शुरू की गई, लेकिन अब यात्री बढ़ने पर तीन और बसों का संचालन शुरू किया गया है। हल्द्वानी, रुद्रपुर और काशीपुर के साथ ही खटीमा से आगे यूपी सीमा सत्रह मील तक भी एक बस चलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि दस दिन में बसों के संचालन से टनकपुर डिपो ने पांच लाख रुपये कमाए हैं, जबकि खर्चा इससे अधिक आया है। एआरएम के मुताबिक लॉकडाउन से पहले अकेले टनकपुर डिपो की कमाई 15 लाख रुपये प्रतिदिन होती थी। इन दिनों सात बसों के संचालन से महज 25 हजार रुपये प्रतिदिन आय हो रही है।