चंपावत। बिनवालगांव-कलियाधुरा सड़क बनाने के लिए वन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं मिल सका है। इस कारण सड़क बनाने का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के 11 गांवों के लोगों को पैदल चलना पड़ रहा है। इस कारण यहां पहुंच रही हर सामग्री की कीमत में भी 40 से 80 प्रतिशत तक वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 16 अगस्त 2021 को देवीधुरा दौरे पर थे। तब उन्होंने पाटी ब्लॉक के बिनवालगांव से कलियाधुरा की 16 किमी लंबी सड़क बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए 8.721 हेक्टेयर वन क्षेत्र का हस्तांतरण लोनिवि के पक्ष में होना है लेकिन दो साल बाद भी यह प्रक्रिया पूरी न होने के कारण इस सड़क के लिए पहाड़ कटिंग का काम शुरू नहीं हो सका है। सड़क की कमी से यहां के गांवों से पलायन बढ़ता जा रहा है। लोनिवि के एई अनुपम राय का कहना है कि वन अनापत्ति संबंधी पत्रावली वन संरक्षक कार्यालय में भेजी गई है। वन विभाग से अनापत्ति मिलने पर ही सड़क की कटिंग शुरू की जा सकेगी।
सड़क बनने पर इन 11 गांवों को होगा लाभ
गोलडांडा, तोलारौकुड़ी, खेतिया, घड्यूड़ा, पलाड़ा, शिपटाडा, सेला, मल्लातोला, कैड़ाईजर, बोलना और कलियाधुरा।
सड़क की कमी से गांव की जिंदगी महंगी हो रही है। घोड़े-खच्चर में ढुलान करने से गैस सिलिंडर की कीमत 500 रुपये बढ़ जाती है। - गोविंद नौलिया, ग्रामीण।
सड़क न होने से क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। बीमार, बुजुर्ग, बच्चों को गांव तक पहुंचने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। - चंदन बिष्ट, ग्रामीण।