आजादी के बाद से सड़क सुविधा का स्वप्न देख रहे बालातड़ी गांव के लोगों ने अभी से आगामी वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों का बायकाट करने का निर्णय लिया है। लोगों ने सवाल उठाया है कि वे वोट दें तो किसे दें, क्यों दें, किसलिए दें। क्योंकि उनकी समस्या जस की तस है।
चुनावों के दौरान सभी पार्टियों के नेता उन्हें सड़क सुविधा का लालच देते आ रहे हैं, लेकिन चुनाव निपटने के बाद सभी लोग गांव की ओर पीठ कर देते हैं। हालात यह हैं कि इस गांव की प्रसव पीड़ा से पीड़ित महिला को 15 दिन पहले ही लोग पाटी या लोहाघाट में अपने रिश्तेदारों या होटलों में ले आते हैं। जिससे उन्हें अनावश्यक धन और समय बर्बाद करना पड़ता है। कई लोग कर्ज लेकर भी महिला की जान बचाने के लिए आते हैं।
सड़क न होने से गांव से 25 फीसदी लोग पलायन कर चुके हैं तथा इतने ही लोग पलायन का मूड बना चुके हैं। ग्राम प्रधान हरीश भट्ट की अध्यक्षता में हुई ग्रामीणों की बैठक में कहा गया कि तीन बार पीएमजीएसवाई से सड़क के लिए सर्वे किया गया, लेकिन सड़क बनने का नाम नहीं ले रही है। गांव के लोगों को सड़क तक आने के लिए सात किमी लंबे दुर्गम रास्तों को पैदल तय कर आना पड़ता है। दो हजार की आबादी वाले इस गांव में जीआईसी, जूनियर हाईस्कूल तथा तीन प्राथमिक विद्यालय हैं। सड़क न होने से गांव का विकास ठहर सा गया है। तारा दत्त भट्ट, घनश्याम भट्ट, हेम भट्ट, बीडीसी सदस्य केशव राम, सुरेश भट्ट, रमेश भट्ट, आनंद भट्ट, जीवन भट्ट ने कहा कि आगामी चुनावों में रोड नहीं तो वोट नहीं का ग्रामीण नारा बुलंद करेंगे।